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'भारत-चीन के बिना समझौता संभव नहीं'

एंगेला मर्केल

मर्केल ने अमरीकी संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित किया.

जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल ने कहा है कि भारत और चीन को विश्वास में लिए बिना जलवायु परिवर्तन पर समझौता संभव नहीं है.

मर्केल अभी अमरीका के दौरे पर हैं.

उनका बयान अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के बयान के साथ आया है जिसमें उन्होंने अपील की है कि जलवायु परिवर्तन पर कोपेनहेगेन में होने वाली बैठक सफल बनाने के प्रयास तेज़ कर देने चाहिए.

एंगेला मर्केल ने अमरीकी संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए बदलते विश्व में भारत और चीन के महत्व को रेखांकित करने की कोशिश की.

उनका कहना था, "इसमें कोई शक नहीं कि दिसंबर में दुनिया की नज़रें हम पर होंगी, यूरोपीय देशों और अमरीकियों पर होंगी. लेकिन भारत और चीन के बिना कोई समझौता नहीं हो सकता."

इसमें कोई शक नहीं कि दिसंबर में दुनिया की नज़रें हम पर होंगी, यूरोपीय देशों और अमरीकियों पर होंगी. लेकिन भारत और चीन के बिना कोई समझौता नहीं हो सकता.

एंगेला मर्केल

मर्केल ने कहा, "लेकिन मुझे विश्वास है कि एक बार यूरोप में हम और अमरीका बाध्यकारी समझौतों को मानने पर राज़ी हो जाएँ तो हम भारत और चीन को भी मना लेंगे."

एंगेला मर्केल पिछले पचास वर्षों में पहली जर्मन चांसलर हैं जिन्होंने अमरीकी संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित किया है.

उन्होंने बदलती दुनिया में भारत, चीन और रूस के साथ मज़बूत संबंधों की वकालत की.

उनका कहना था, "बर्लिन की दीवार ढहने, सूचना क्रांति और बड़ी अर्थव्यवस्था के रुप में भारत और चीन के उदय ने 21 वीं सदी की दुनिया को बदल दिया है."

ओबामा की अपील

इस बीच अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि अमरीका और यूरोपीय संघ को कोपेनहेगन में होनेवाले जलवायु परिवर्तन पर सम्मेलन को लेकर अपने प्रयास तेज़ कर देने चाहिए.

अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इस विषय पर वरिष्ठ यूरोपीय संघ के अधिकारियों के साथ बैठक की है.

हमने जलवायु परिवर्तन पर गहन बातचीत की और हम इस बात पर सहमत हुए है कि अभी से कोपेनहेगन में होने वाली बैठक को लेकर अपने प्रयासों को दोगुना कर दें ताकि बैठक का प्रारूप तैयार किया जा सके.

बराक ओबामा

ओबामा का कहना था,'' हमने जलवायु परिवर्तन पर गहन बातचीत की और हम इस बात पर सहमत हुए है कि अभी से कोपेनहेगन में होने वाली बैठक को लेकर अपने प्रयासों को दोगुना कर दें ताकि बैठक का प्रारूप तैयार किया जा सके.''

दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून का कहना है कि उन्हें नहीं लगता है कि कोपनहेगन में होनेवाले जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में दुनियाभर के नेता किसी समझौते पर सहमत हो पाएंगे.

बान की मून का कहना था कि विभिन्न देश ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन की सीमा पर कोई वादा करने को तैयार नहीं लगते हैं. वे सैद्धांतिक रूप से भले ही सहमत हो सकते हैं.

यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष होज़े मैनुएल बरोसो ने भी इस सम्मलेन की सफलता पर संदेह व्यक्त किया है.

उनका कहना है कि वो सम्मेलन की शुरुआत से पहले चल रही बातचीत को लेकर चिंतित हैं.

बीबीसी को जानिए

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