
महाराष्ट्र के गवर्नर ने कॉंग्रेस और एनसीपी से जल्दी सरकार बनाने को कहा.
महाराष्ट्र के राज्यपाल एस सी जमीर ने कॉंग्रेस के नेता अशोक चह्वाण और राष्ट्रवादी कॉंग्रेस पार्टी के नेता छगन भुजबल से मुलाक़ात की है और दोनों पार्टियों से सरकार का जल्दी गठन करने को कहा है.
महाराष्ट्र में पिछले तेरह दिनों से कोई सरकार नहीं है. राज्य विधानसभा के चुनाव 13 अक्टूबर को हुए थे लेकिन चुनाव जीत कर सत्ता में लौटी कॉंग्रेस और राष्ट्रवादी कॉंग्रेस पार्टी के बीच विभागों के बंटवारे को लेकर विवाद बना हुआ है.
एनसीपी के नेता छगन भुजबल जो उपमुख्यमंत्री के उम्मीदवार हैं उनका कहना है कि विलम्ब कॉंग्रेस पार्टी के रवय्ये के कारण हो रहा है.
उन्होने राज्यपाल से बातचीत करने के बाद प्रसार माध्यमों से कहा, "सरकार के गठन में देरी हमारी वजह से नहीं बल्कि कॉंग्रेस के रवय्ये के कारण हो रही है. हमने उनसे कहा है कि हमें 1999 का फॉर्मूला मंज़ूर है लेकिन कॉंग्रेस को वो स्वीकार्य नहीं".
सरकार के गठन में देरी हमारी वजह से नहीं बल्कि कॉंग्रेस के रवय्ये के कारण हो रही है. हमने उनसे कहा है कि हमें 1999 का फॉर्मूला मंज़ूर है लेकिन कॉंग्रेस को वो स्वीकार्य नहीं.
छगन भुजबल, एनसीपी के नेता
कॉंग्रेस के साथ बातचीत करने वाले एनसीपी के नेताओं के दल में शामिल कृपा शंकर सिंह कहते हैं, “ दो पार्टियों का गठबंधन है उसमें थोड़ा समय ज़रूर लगता है. लेकिन मुझे लगता है अब और ज़्यादा देर नहीं होगी".
चुनाव परिणाम
चुनाव में कॉंग्रेस को 82 और राष्ट्रवादी कॉंग्रेस पार्टी को 62 सीटें मिली थीं जिससे उनके सत्ता में आने का रास्ता साफ़ हो गया. लेकिन राजनीतिक प्रेक्षकों का अनुमान था कि मंत्रिमंडल के गठन में दोनों पार्टियों के बीच में असहमति होगी और वही हुआ.
अभी तक केवल मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के पदों का फ़ैसला हो सका है. मंत्रिमंडल में 44 विभाग हैं. कॉंग्रेस एनसीपी को 20 विभाग देना चाहती है और कुछ महत्वपूर्ण विभाग अपने पास रखना चाहती है. जबकि एनसीपी का कहना है कि 1999 का फ़ॉर्मूला अपनाया जाए जब दोनों पार्टियों ने 22-22 विभाग बांटे थे.
लेकिन ऐसा लगता है कि इस असहमति ने अब एक बड़े राजनीतिक संकट का रूप ले लिया है. कुछ लोगों का कहना है कि ये राजनीतिक संकट सांविधानिक संकट का रूप भी ले सकता है.
उधर विपक्षी शिव सेना और भारतीय जनता पार्टी ने दबे शब्दों में कहना शुरू कर दिया है कि अब राष्ट्रपति शासन का समय आ गया है.















