भारत ने 200 टन सोना ख़रीदा

सोने की ईंटे

भारतीय रिज़र्व बैंक ने अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से 200 टन सोना ख़रीदा.

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भारतीय रिज़र्व बैंक को 200 टन सोना छह अरब 70 करोड़ डॉलर में बेचा है. ये दुनिया के कुल सालाना उत्पादन का आठ प्रतिशत है.

सन 2000 के बाद से पहली बार कोष ने किसी केंद्रीय बैंक को सोना बेचा है.

नई दिल्ली के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ पब्लिक फ़ाइनेन्स एंड पॉलिसी की प्रोफ़ेसर इला पटनायक ने बीबीसी को बताया कि भारतीय रिज़र्व बैंक ने सोना इसलिए ख़रीदा है क्योंकि अमरीकी डॉलर की अपेक्षा सोना अधिक सुरक्षित निवेश माना जाता है.

प्रोफ़ेसर पटनायक ने कहा, “भारत जैसे उभरते बाज़ारों में एक बार फिर से पैसा आ रहा है क्योंकि यहीं विकास हो रहा है और यहीं लाभ भी होगा. लेकिन इससे धन की आपूर्ति बढ़ जाती है और उसका सीधा असर पड़ता है मुद्रास्फीति पर. इससे बचने के दो उपाय हैं या तो डॉलर न ख़रीदे जाएं या फिर उसे सोने की शक्ल में तब्दील किया जाए. ”

सोना बेचने का कारण

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने 403.3 टन सोने में से आधा भारत को बेचा है जिससे वह ग़रीब देशों को कम सूद पर ऋण दे सके.

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने कहा था कि उसे इस बिक्री से और दूसरे स्रोतों से जो धन मिलेगा उससे वह कम आय वाले देशों को सस्ते सूद पर क़र्ज़ दे सकेगा. आईएमएफ़ सन 2014 तक 17 अरब डॉलर अतिरिक्त ऋण देना चाहता है.

इस बिक्री से कोष को उसके प्रमुख उद्देश्यों को प्राप्त करने में मदद मिलेगी. इससे कोष के पास पर्याप्त धन जमा हो जाएगा जिससे हम गरीब देशों को सस्ते क़र्ज दे पाएंगे.

डॉमिनीक स्ट्रॉस कान, आईऐमऐफ़ के प्रबंध निदेशक

आईएमएफ़ के प्रबंध निदेशक डॉमिनीक स्ट्रॉस कान ने कहा, “सोने की इस बिक्री से कोष को अपने प्रमुख उद्देश्यों को प्राप्त करने में मदद मिलेगी. इससे कोष के पास पर्याप्त धन जमा हो जाएगा जिससे हम गरीब देशों को सस्ते क़र्ज दे पाएंगे”.

कोष ने मुश्किल में पड़ी अर्थव्यवस्थाओं की मदद करने के लिए कई बार सोना बेचा है.

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष का कहना है कि वह सीधे केन्द्रीय बैंको को सोना बेचने को तैयार है और अगर ज़रूरत पड़े तो खुले बाज़ार में भी उसे बेचेगा. कोष के अधिकारियों ने यह नहीं बताया कि और किन देशों के केन्द्रीय बैंको ने सोना ख़रीदने में दिलचस्पी दिखाई है.

विदेशी मुद्रा भंडार

एशियाई देशों ने 1998 के वित्तीय संकट के बाद से अपने विदेशी मु्द्रा भंडार में बढ़ोतरी की है और अब वो अपनी सम्पत्ति विभिन्न रूपों में रखना चाहते हैं क्योंकि अमरीकी डॉलर की क़ीमत घट रही है.

भारत के पास आवश्यकता से अधिक विदेशी मुद्रा भंडार है जिसे कम करना ज़रूरी था जिससे रुपए पर दबाव कम हो सके.

प्रोफ़ेसर इला पटनायक, नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ पब्लिक फ़ाइनेन्स एंड पॉलिसी नई दिल्ली

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 268.3 अरब डॉलर है. प्रोफ़ेसर पटनायक ने कहा, "भारत के पास आवश्यकता से अधिक विदेशी मुद्रा भंडार है जिसे कम करना ज़रूरी था जिससे रुपए पर दबाव कम हो सके".

सोने का उत्पादन पिछले सात सालों में घटा है जबकि मांग निरंतर बढ़ी है. केन्द्रीय बैंक ही नहीं बल्कि आम निवेशक भी सोना ख़रीदना चाहते हैं.

भारत दुनिया का सबसे बड़ा सोने का बाज़ार है लेकिन उसने इस साल कम सोना आयात किया क्योंकि उसके दाम बहुत चढ़े हुए हैं.

प्रोफ़ेसर पटनायक ने कहा, “सोने के दाम इसलिए बढ़ रहे हैं क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में सोने की क़ीमत डॉलर में आंकी जाती है. अमरीका में मंदी चल रही है और डॉलर का मूल्य घट रहा है. इसलिए सोने की क़ीमत अभी बढ़ती नज़र आएगी”.

लेकिन भारतीय रिज़र्व बैंक के सोना ख़रीदने का सोने के दाम पर कोई असर नहीं पड़ेगा. क्योंकि यह सोना भारतीय बाज़ार में प्रवेश नहीं करेगा.

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