
इसारयल के प्रधानमंत्री आईएईए के ईरान प्रस्ताव से सहमत
इसरायल ने आईएईए के ईरान प्रस्ताव को समर्थन दिया है.
इसरायल ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर उठे विवाद के निपटारे के लिए पेश किए गए अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रस्ताव को एक सकारात्मक क़दम बताया है.
इसरायल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने कहा है कि ईरान को दिए गए उस प्रस्ताव का सतर्कता से स्वागत किया है, जिसमें कहा गया है कि ईरान अपने कम संवर्धित यूरेनियम के बदले रूस से अधिक संवर्धित यूरेनियम ख़रीदे.
नेतन्याहू का कहना था कि संयुक्त राष्ट्र का ये प्रस्ताव ईरान के परमाणु हथियार बनाने पर रोक की दिशा में पहला सकारात्मक क़दम होगा.
ख़बरें हैं कि ईरान ने संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावित समझौते में कुछ संशोधनों की मांग की थी लेकिन संयुक्त राष्ट्र की परमाणु एजेंसी आईएईए को दिए अपने जवाब में ईरान ने क्या संशोधन मांगे हैं इस बारे में विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है.
आईएईए के प्रमुख मोहम्मद अल बरादेई के इस प्रस्ताव में ईरान से कहा गया है कि वो अपने घोषित 1.5 टन कम संवर्धित यूरेनियम का 75 प्रतिशत विदेशों में भेजे और वहाँ से इसे अधिक संवर्धित यूरेनियम में बदलवा कर अपने तेहरान स्थित परमाणु संयंत्र में इस्तमाल के लिए वापस ले ले.
इसरायल की चिंता
इसरायल को ये आशंका है कि ईरान के यूरेनियम संवर्धन के कार्यक्रम को अगर पूरी तरह से नहीं रुकावाया गया तो ईरान के परमाणु बम बना पाने का ख़तरा बरक़रार रहेगा.
इसरायल के प्रतिरक्षामंत्री एहूद बराक पहले भी ये कह चुके हैं कि ईरान से संवर्धित यूरेनियम तो बाहर भेज ही देना चाहिए साथ ही आगे ईरान में यूरेनियम संवर्धन के अभियान बिल्कुल बंद करवा दिए जाने चाहिए.
अक्तूबर में ही जिनेवा और विएना में इस मुद्दे पर हुई अंतर्राष्ट्रीय बातचीत में एहूद बराक ने ये भी कहा था, कि ईरान के परमाणु कार्यक्रमों पर रोक के लिए कूटनीति को थोड़ा समय दिया जाए, और अगर तय समयसीमा में वो सफल न हो पाए, तो ईरान पर गंभीर और तुरंत प्रतिबंध लगाने में देर नहीं की जानी चाहिए.
प्रस्ताव
आईएईए ने ईरान, अमरीका, रूस और फ्रांस के साथ बातचीत के बाद यह प्रस्ताव रखा था कि ईरान के यूरेनियम को संवर्द्धित करने के लिए रूस और फ्रांस भेजा जाए, जहां से इसे अधिक संवर्धित करके तेहरान स्थित शोध रिएक्टर में इस्तेमाल के लिए ईरान वापस भेजा जाए.
आईएईए का मानना है कि इस तरह ईरान को अपने शोध रिएक्टर के लिए पर्याप्त ईंधन तो मिलेगा, लेकिन वह परमाणु बम बनाने के लिए उपयुक्त नहीं होगा.
उल्लेखनीय है कि अमरीका सहित कई पश्चिमी देश ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर आपत्ति जताते हैं क्योंकि वे मानते हैं कि ईरान परमाणु बम बनाने का प्रयास कर रहा है.
लेकिन ईरान का यही कहना है कि परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण कार्यों के लिए है.














