जलवायु परिवर्तन पर भारत-चीन एकमत

जयराम और झेन्हुआ

दोनों देशों में सीमा विवाद को लेकर तनाव पैदा हो गया था.

सीमा विवाद को लेकर हाल ही में रिश्तों में आई खटास को किनारे करते हुए भारत और चीन ने जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर एकराय रखने की घोषणा की है.

दोनों देशों ने बुधवार को एक समझौते पर हस्ताक्षर किए और कहा कि वे अंतरराष्ट्रीय मंचों से जलवायु परिवर्तन के मसले पर एक स्वर में बोलेंगे.

दिसंबर में डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगेन में इसी मुद्दे पर बड़ी बैठक हो रही है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि दोनों देश क्योटो संधि के उस प्रस्ताव को बनाए रखने के पक्ष में लगते हैं जिसके मुताबिक कार्बन उत्सर्जन के लिए धनी देश पूरी तरह ज़िम्मेदार हैं.

हालाँकि अमरीका चाहता है कि संभावित नए समझौते पर भारत और चीन दोनों दस्तख़त करें जो वैधानिक तौर पर सदस्य देशों के लिए बाध्यकारी होगी.

समझौता

भारत के पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश और चीन के राष्ट्रीय विकास और सुधार मंत्री जी झेन्हुआ ने दिल्ली में समझौते पर हस्ताक्षर किए.

चीन और भारत दोनों का मानना है कि विकसित देशों और विकासशील देशों के लिए उत्सर्जन में कटौती के मानक अलग-अलग होने चाहिए.

दोनों देश मानते हैं कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग से ही इस जटिल समस्या से छुटकारा मिल सकता है.

भारत में चीन के राजदूत झेन यान का कहना था, "चीन और भारत दोनों के मत जलवायु परिवर्तन पर एक जैसे हैं और दोनों कोपेनहेगेन शिखर बैठक की सफलता के लिए प्रतिबद्ध हैं."

दोनों देशों के बीच उर्जा संरक्षण, ग़ैर पारंपरिक उर्जा स्रोतों जैसे क्षेत्र में सहयोग पर सहमति बनी है और एक कार्यदल की स्थापना की गई है औ

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