
लालगढ़ को माओवादियों का गढ़ माना जाता है
पश्चिम बंगाल के लालगढ़ में पुलिस ने फ़िल्मी अंदाज़ में कार्रवाई करते हुए माओवादी समर्थक नेता छत्रधर महतो को गिरफ़्तार कर लिया है.
लालगढ़ में माओवादी समर्थकों और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) कैडरों के बीच हिंसा में महतो की तलाश थी.
पुलिस ने उसे लालगढ के समीप पिकरा से गिरफ्तार कर लिया है.
छत्रधर महतो गत नवंबर से लालगढ क्षेत्र में कथित पुलिस उत्पीड़न के विरुद्ध आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे. वे पीपुल्स कमेटी अगेन्स्ट पुलिस एट्रोसिटीज़ (पीसीएपीए) के नेता हैं.
महतो को उस समय गिरफ्तार किया गया जब वे एक पत्रकार को साक्षात्कार दे रहे थे.
महतो की ग़िरफ़्तारी बेहद नाटकीय अंदाज़ में की गई और ऐसा आमतौर पर फ़िल्मों में ही दिखता है.
राज्य पुलिस के नक्सल विरोधी दस्ते के एक अधिकारी ने एक स्थानीय पत्रकार की मदद से सिंगापुर के एक टेलीविज़न पत्रकार के रूप में महतो से संपर्क किया और उन्हें इंटरव्यू के लिए राज़ी कर लिया. उसके साथ कुछ स्थानीय पत्रकार के रूप में दो- तीन पुलिसकर्मी भी थे.
जैसे ही कथित इंटरव्यू ख़त्म हुआ कैमरामैन का रूप धरे पुलिस ने पिस्तौल दिखाकर महतो को गिरफ्तार कर लिया.
हमें ये नहीं पता था कि पत्रकार के भेष में आकर पुलिस हमारे ज़रिए माओवादी नेताओं तक पहुंचेंगे.
एक स्थानीय पत्रकार
इस पूरे घटनाक्रम के एक चश्मदीद स्थानीय पत्रकार ने बताया, ‘हमें ये नहीं पता था कि पत्रकार के भेष में आकर पुलिस हमारे ज़रिए माओवादी नेताओं तक पहुंचेंगे.’
महतो स्थानीय टेलिविज़न चैनलों से नियमित रूप से बात करते थे लेकिन 19 जून को केंद्रीय अर्धसैनिक बलों और राज्य की पुलिस ने जब माओवादियों के ख़िलाफ़ अभियान शुरू किया तब से वे भूमिगत हो गये थे.
सुरक्षाबलों के साथ संघर्ष
उनके नेतृत्व में स्थानीय आदिवासियों ने लालगढ में समानांतर व्यवस्था कायम कर ली थी इसे मुक्त ज़ोन घोषित कर 9 महीनों तक अपने नियंत्रण में रखा.
इसके बाद ही केंद्रीय बलों और स्थानीय पुलिस ने लालगढ को माओवादियों की गिरफ़्त से मुक्त कराया जो इन आंदोलनकारियों की मदद कर रहे थे.
गत वर्ष ये आंदोलन 2 नवंबर के बाद शुरु हुआ जब सालबोनी में एक बारूदी सुरंग के विस्फोट में पक्ष्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री, बुद्घदेब भट्टाचार्य और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के बाल- बाल बचने के बाद पुलिस ने लोगों के घरों पर छापे मारे थे.
लेकिन राज्य में वामपंथी गठबंधन में शामिल दल फ़ॉरवर्ड ब्लॉक के महासचिव अशोक घोष ने इस गिरफ़्तारी के समय पर सवाल उठाया है.
उन्होंने ये भी सवाल उठाया है कि क्या कथित पुलिस उत्पीड़न के विरुद्ध आवाज़ उठाने वाले छत्रधर महतो को माओवादी क़रार देना और गिरफ़्तार करना उचित है.














