
अमरीका और रुस पहली बार ईरान के मामले पर एक रुख प्रकट कर रहे हैं.
अमरीका और रुस ने ईरान और परमाणु मुद्दों पर सहयोग करने के संकेत देते हुए कहा है कि अगर ईरान परमाणु हथियार विकसित करने की कोशिश करता है तो उस पर और प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं.
अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और रुस के राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान बातचीत की है.
रुस के राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ बैठक के बाद संकेत दिए कि ईरान पर प्रतिबंध लगाने के मामले में वो अपना रुख बदल सकते हैं.
कम ही मामलों में प्रतिबंध लगाने से कुछ हासिल होता है लेकिन कुछ मामलों में प्रतिबंध लगाना आवश्यक हो जाता है
दिमित्री मेदवेदेव, रुसी राष्ट्रपति
उनका कहना था, '' कम ही मामलों में प्रतिबंध लगाने से कुछ हासिल होता है लेकिन कुछ मामलों में प्रतिबंध लगाना आवश्यक हो जाता है.''
रुस हमेशा से ईरान पर प्रतिबंध लगाने का विरोध करता रहा है लेकिन एक रुसी अधिकारी का कहना है कि अगर ईरान के ख़िलाफ़ संयुक्त राष्ट्र निरीक्षक पर्याप्त सबूत देते हैं तो रुस प्रतिबंधों का समर्थन करेगा.
ईरान पिछले कुछ समय में अपनी अंतरराष्ट्रीय का उल्लंघन करता रहा है लेकिन अब हम ईरान के ख़िलाफ़ सकारात्मक दिशा में बढ़ रहे हैं
ओबामा, अमरीकी राष्ट्रपति
मेदेवेदेव का कहना था कि वो चाहते हैं कि ईरान सही फ़ैसले करे. उनका कहना था कि अगर ईरान ने परमाणु कार्यक्रम को नहीं रोका तो प्रतिबंध लगाने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है.
राष्ट्रपति ओबामा का कहना था कि अमरीका और रुस का लक्ष्य एक ही है कि ईरान अपने शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा का कार्यक्रम चलाए न कि परमाणु हथियारों का.
उनका कहना था,'' ईरान पिछले कुछ समय में अपनी अंतरराष्ट्रीय का उल्लंघन करता रहा है लेकिन अब हम ईरान के ख़िलाफ़ सकारात्मक दिशा में बढ़ रहे हैं. ''
अमरीका और रुस के रिश्तों में बेहतरी पिछले हफ्ते राष्ट्रपति ओबामा के उस फ़ैसले के बाद आई है जिसके तहत अमरीका ने यूरोप में तैनात की जाने वाली मिसाईल रक्षा प्रणाली को रद्द करने की घोषणा की थी.
रुसी राष्ट्रपति ने ओबामा के इस फ़ैसले को तर्कसंगत बताया और कहा कि इसमें रुस की चिंताओं को ध्यान में रखा गया है.
उधर संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सारकोज़ी ने भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा उठाते हुए कहा कि ईरान के अधिकारियों को अगर लगता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय कोई प्रतिक्रिया नहीं देगा तो वो बहुत बड़ी ग़लती कर रहे हैं.
ब्रितानी विदेश मंत्रि मिलिबैंड ने भी साफ़ किया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय चाहता है कि ईरान जेनेवा की वार्ता से पहले अपने परमाणु कार्यक्रम पर गंभीर बयान दे.
अक्तूबर महीने की पहली तारीख से विश्व के छह बड़े देश अमरीका, ब्रिटेन, चीन, फ्रांस, रुस और जर्मनी, ईरान के अधिकारियों के साथ चर्चा करने वाले हैं जिसमें वैश्विक परमाणु निशस्त्रीकरण पर बात होगी.














