दुनिया के बड़े औद्योगिक देशों और विकासशील देशों में इस बात पर सहमति हो गई है कि ग्लोबल वॉर्मिंग को सीमित किया जाए और जलवायु परिवर्तन से पैदा हो रहे ख़तरों को कम किया जाए.

ओबामा ने इस मुद्दे पर चुनौतियों का भी ज़िक्र किया
इटली के ला-अक़िला शहर में जी-8 देशों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने यह घोषणा की.
राष्ट्रपति ओबामा ने कहा कि दोनों पक्ष अब ग्लोबल वॉर्मिंग को अधिकतम दो डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने पर सहमत हो गए हैं.
उन्होंने बताया कि पहली बार विकासशील देश भी ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने की कोशिशों में शामिल होने को तैयार हैं.
बीबीसी संवाददाता जेम्स रॉबिन्स का कहना है कि जलवायु परिवर्तन पर ये कोई आख़िरी समझौता नहीं है. लेकिन किसी को इस सहमति की उम्मीद नहीं थी.
अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने बताया कि दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं ने कुछ महत्वपूर्ण क़दम उठाए हैं और इनमें औद्योगिक देश भी शामिल हैं. साथ ही भारत और चीन के नेतृत्व में बड़े विकासशील देश भी इसके लिए तैयार हैं.
हमने एक अच्छी शुरुआत की है. लेकिन मैं यह स्वीकार करने वाला पहला व्यक्ति हूँ कि इस मुद्दे पर प्रगति आसान नहीं होगी. लेकिन हमें अपनी उस निराशावादी भावना से लड़ना होगा जिसमें हम ये सोचने लगते हैं कि ये समस्या इतनी बड़ी है कि हम इस मुद्दे पर महत्वपूर्ण क़दम नहीं बढ़ा सकते
बराक ओबामा
सभी देश इस बात पर एकमत हैं कि वे ग्लोबल वॉर्मिंग को दो डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के लिए काम करेंगे.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ये काफ़ी महत्वपूर्ण क़दम है, क्योंकि इसमें सिर्फ़ प्रदूषण फैलाने वाले देश ही नहीं बल्कि सब उत्सर्जन रोकने को सहमत हैं.
राष्ट्रपति ओबामा ने स्पष्ट किया कि विकासशील देशों को आर्थिक समृद्धि में हिस्सेदारी की अपनी आकांक्षाओं का बलिदान नहीं करना पड़ेगा.
उन्होंने कहा कि इस बैठक में सभी इस बात पर सहमत थे कि वर्ष 2050 तक विकसित देश ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में 80 फ़ीसदी कटौती करेंगे ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ये कटौती 50 प्रतिशत तक हो जाए.
'अच्छी शुरुआत'
राष्ट्रपति ओबामा ने कहा, "हमने एक अच्छी शुरुआत की है. लेकिन मैं यह स्वीकार करने वाला पहला व्यक्ति हूँ कि इस मुद्दे पर प्रगति आसान नहीं होगी. लेकिन हमें अपनी उस निराशावादी भावना से लड़ना होगा जिसमें हम ये सोचने लगते हैं कि ये समस्या इतनी बड़ी है कि हम इस मुद्दे पर महत्वपूर्ण क़दम नहीं बढ़ा सकते."

विकासशील देशों पर भी उत्सर्जन कम करने का दबाव है
उन्होंने कहा कि बैठक में इस बात पर भी प्रतिबद्धता जताई गई है कि उत्सर्जन कम करने के लिए ऐसे क़दम उठाए जाएँगे, जिन्हें मापा जा सके, प्रमाणित किया जा सके और जिनकी रपट भी तैयार हो.
बैठक में इस पर भी सहमति हुई कि एक ऐसे वर्ष को लक्ष्य बनाया जाए, जिसके बाद उत्सर्जन कम होने लगेगा.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इस बैठक में राष्ट्रपति ओबामा ने दिसंबर में कोपेनहेगेन में एक नई जलवायु संधि की कोशिशों को कम नहीं किया.
लेकिन इस बैठक में शामिल सभी देशों को ये ज़रूर लग रहा था कि संधि की कोशिश करने वालों को कम से कम एक संकेत तो मिल ही गया है.














