Advertisement

संघर्ष वाले क्षेत्रों में रेड क्रॉस का अध्ययन

अंतरराष्ट्रीय राहत संस्था रेड क्रॉस

लगभग 56 प्रतिशत लोगों का कहना था कि उन्हें घर छोड़कर कहीं और जाना पड़ा

अंतरराष्ट्रीय राहत संस्था रेड क्रॉस ने सशस्त्र संघर्ष वाले आठ क्षेत्रों में एक अध्ययन किया है जिससे चौंकाने वाले नतीजे प्राप्त हुए हैं.इस अध्ययन में नागरिकों पर आधुनिक जंग के असर के बारे में जानकारी एकत्र की गई है.

इन आठ क्षेत्रों - अफ़ग़ानिस्तान, जॉर्जिया, लाइबेरिया, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ कॉंगो, कोलंबो, हेती, लेबनान और फ़िलिपींस - में चार हज़ार आम लोगों से उनके अनुभवों के बारे में पूछा गया.

बीबीसी संवाददाता इमोजेन फ़ॉक्स के अनुसार अध्ययन के दौरान लगभग 56 प्रतिशत लोगों ने बताया कि उन्हें अपने घर छोड़कर अन्य जगहों पर जाना पड़ा है.

जिन लोगों से बात की गई उनमें से लगभग आधे लोगों का कहन था कि उन्हें अपने परिजनों से बिछड़ना पड़ा और 44 प्रतिशत का कहना था कि उन्होंने अपने सामने लड़ाई होते देखी थी.

अध्ययन से पता चलता है कि अंतरराष्ट्रीय क़ानून, जीनेवा कनवेनशंन के बावजूद 21वीं सदी में आम नागरिकों - पुरुष, महिलाएँ और बच्चे मारे जा रहे हैं, घायल हो रहे हैं और जंग के कारण विस्थापित हो रहे हैं. और कई बार उन्हें जंग से दूर रखने या बचाने के ख़ास प्रयास भी नहीं किए जाते.

पीयर क्राहेबुल, रेड क्रॉस निदेशक

'रिश्तेदारों को मरते देखा'

लगभग एक तिहाई लोगों का कहना था कि उन्होंने अपने किसी रिश्तेदार को लड़ाई के दौरान मारे जाते हुए देखा.

ये अध्ययन सोलफ़ेरीनो की जंग के 150 साल पूरे होने पर कराया गया है जिसके बाद रेड क्रॉस का गठन हुआ था.

उस लड़ाई के दौरान 40 हज़ार सैनिक मारे गए थे लेकिन केवल एक आम नागरिक की मृत्यु हुई थी.

उससे प्रेरणा लेकर मानवता की सेवा के लक्ष्य से हेनरी ड्यूनाँ ने रेड क्रॉस बनाने के बारे में सोचा था.

बीबीसी संवाददाता ने रेड क्रॉस की कार्रवाई के निदेशक पीयर क्राहेबुल के हवाले से कहा है, "अध्ययन से पता चलता है कि अंतरराष्ट्रीय क़ानून, जीनेवा कनवेनशंन के बावजूद 21वीं सदी में आम नागरिकों - पुरुष, महिलाएँ और बच्चे मारे जा रहे हैं, घायल हो रहे हैं और जंग के कारण विस्थापित हो रहे हैं. और कई बार उन्हें जंग से दूर रखने या बचाने के ख़ास प्रयास भी नहीं किए जाते."

बीबीसी को जानिए

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.