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अराफ़ात पर एक नया प्रस्ताव
यासिर अराफ़ात को फ़लस्तीनी इलाक़े से हटाने के इसराइली इरादे पर अरब देशों ने संयुक्त राष्ट्र में एक और अपील की है. सूडान द्वारा की गई इस अपील में संयुक्त राष्ट्र महासभा में इस मामले पर विचार करने का आग्रह किया गया है.
संयुक्त राष्ट्र में बीबीसी के संवाददाता ग्रेग बैरो का कहना है कि अरब देश सुरक्षा परिषद में नाकाम रहने के बाद अब संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपनी बात रखना चाहते हैं. आपको याद होगा कि इसराइल के ख़िलाफ़ मंगलवार को सुरक्षा परिषद में लाए गए सीरिया के प्रस्ताव को अमरीका ने वीटो कर दिया था. अमरीका का कहना था कि प्रस्ताव में "आतंकवाद की खुलकर आलोचना नहीं की गई है." नाकाम सूडान का कहना है कि सुरक्षा परिषद अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा क़ायम रखने के अपने दायित्व को पूरा करने में नाकाम रहा है. सभापति को लिखे उसके पत्र के अनुसार "अब संयुक्त राष्ट्र महासभा कि ये ज़िम्मेदारी है कि इस दायित्व को पूरा किया जाए". इस अपील पर फ़िलहाल विचार हो रहा है. संयुक्त राष्ट्र महासभा में इस तरह के प्रस्ताव काफ़ी बहुमत से पहले भी पारित हो चुके हैं क्योंकि वहाँ हर सदस्य देश वोट दे सकता है. इसके अलावा यहाँ किसी भी देशो को किसी भी प्रस्ताव को वीटो करने का अधिकार नहीं होता. ये अधिकार सिर्फ़ सुरक्षा परिषद में उसके पाँच स्थायी सदस्यों - अमरीका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस - के पास है. महासभा से पारित प्रस्ताव को विश्व जनमत के रूप में देखा जाता है लेकिन उसे लागू कराने की कोई बाध्यता नहीं होती. दूसरी ओर सुरक्षा परिषद में पारित किए गए प्रस्ताव सदस्य देशों को मानने पड़ते हैं अन्यथा उनके विरूद्ध कार्रवाई की जा सकती है. |
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