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इसराइल के लिए अमरीकी वीटो
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमरीका ने इसराइल के ख़िलाफ़ लाए गए एक प्रस्ताव को वीटो कर दिया है. इस प्रस्ताव में फ़लस्तीनी नेता यासिर अराफ़ात को देश से निकाले जाने के फ़ैसले पर इसराइल की निंदा की गई थी.
संयुक्त राष्ट्र में अमरीका के राजदूत जॉन नेग्रोपॉन्ट ने कहा है कि यह प्रस्ताव "ग़लत" था क्योंकि इसमें "आतंकवादी कार्रवाइयों की खुलकर भर्त्सना नहीं की गई है." इस प्रस्ताव का समर्थन कई अरब देशों ने किया था और माँग की थी कि "इसराइल यासिर अराफ़ात को देश से निकालने का इरादा छोड़ दे और फ़लस्तीनी अथॉरिटी के निर्वाचित अध्यक्ष को नुक़सान पहुँचाने का ख़याल छोड़ दे." शुरूआत इसकी शुरूआत इसराइली सुरक्षा कैबिनेट की बैठक के साथ हुई थी जिसमें यासिर अराफ़ात को शांति की राह में बाधा बताया गया था और कहा गया था कि उन्हें देश से निकाल दिया जाना चाहिए. लेकिन यह तय नहीं किया गया था कि अगर उन्हें निकाला गया तो कब निकाला जाएगा, इसके बाद फ़लस्तीनी इलाक़ों में इसराइल के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ भारी विरोध प्रदर्शन हुए थे. अमरीकी विदेश मंत्री कॉलिन पॉवेल ने कहा था कि यासिर अराफ़ात को देश से निकालना या मार डालना अरब जगत में एक भारी ग़ुस्से को जन्म देगा इसलिए इसराइल को इससे बाज़ आना चाहिए. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इसराइल के विरूद्ध लाए गए प्रस्ताव पर ज़ोरदार बहस हुई और चालीस से अधिक देशों ने इसराइल की निंदा की.
इस बहस के दौरान अरब और इसराइली कूटनीतिकों के बीच काफ़ी कड़वी और तीख़ी छींटाकशी हुई. सोमवार को भी संयुक्त राष्ट्र में इसराइल के प्रतिनिधि डैन गिलरमैन ने फ़लस्तीनी नेता अराफ़ात को "पेशेवर आतंकवादी" कहा था जिसके विरोध में फ़लस्तीनी प्रतिनिधि बैठक से उठकर चले गए थे. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ताज़ा प्रस्ताव सीरिया ने रखा था जिसमें माँग की गई थी कि इसराइल वादा करे कि वह यासिर अराफ़ात को देश से नहीं निकालेगा. सीरिया ने अपने इस प्रस्ताव में काफ़ी फेरबदल किया था क्योंकि उसे अमरीकी वीटो का ख़तरा दिख रहा था, उसने एक अंश जोड़ा था जिसमें कहा गया था कि "सीरिया मध्य पूर्व में हाल के दिनों में बढ़ी हिंसा से बहुत चिंतित है." लेकिन संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी दूत का कहना था कि "इस प्रस्ताव में हमास और अल अक्सा ब्रिगेड जैसे आतंकवादी संगठन की आलोचना नहीं की गई है." |
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