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सोमवार, 15 सितंबर, 2003 को 09:03 GMT तक के समाचार
बदसूरत लोगों का शहर
सितंबर माह के पहले रविवार को होता है विशेष आयोजन
सितंबर माह के पहले रविवार को होता है विशेष आयोजन

ख़ूबसूरती शायद ज़्यादातर लोगों को पसंद होती है और लोग ख़ूबसूरती की तारीफ़ करते कहीं भी देखे जा सकते हैं, फिर वह चाहे लोगों की हो,वस्तुओं की या इमारतों की.

मगर ये ख़ूबसूरती एक दूसरे वर्ग को भी जन्म देती है और वह है बदसूरतों का.

ऐसे ही कुछ लोगों को आसरा मिला है इटली के ला मार्श में.

वहाँ के पायोबिको क्षेत्र के बाहर एक संकेत लगा है जो वहाँ आने वालों का स्वागत करता है, बदसूरत लोगों की दुनिया की राजधानी में.


छोटी नाक की वजह से टेलीस्फ़ोरो बदसूरत माने गए
लगभग दो हज़ार लोगों की जनसंख्या वाले इस नगर में ही 'बदसूरतों का क्लब' स्थित है और इसीलिए इसे बदसूरतों की राजधानी का नाम दिया गया है.

हर साल सितंबर माह के पहले रविवार को क्लब के नए अध्यक्ष का चुनाव किया जाता है और हर साल एक ही व्यक्ति को इसका मुखिया चुना जाता है.

टेलीस्फ़ोरो याकोबेली कई वर्षों से ये पद सँभाले हैं और वह इस क्लब में इसलिए हैं क्योंकि उनकी नाक उतनी लंबी नहीं है.

ऐसे में लंबी नाक वालों की संस्कृति के बीच उनकी ये छोटी नाक ही उन्हें बदसूरत बनाने के लिए काफ़ी है.

लंबा संघर्ष

याकोबेली ने पूरी ज़िंदग़ी शारीरिक सुंदरता को महत्व देने वाले समाज में बदसूरतों को पहचान दिलाने के संघर्ष में ही लगा दी है.

वह कहते हैं, "मैं पूरी तरह आश्वस्त हूँ और बाक़ी लोग भी मुझसे सहमत होंगे कि आख़िर में हम ही विजेता होंगे."


मैं पूरी तरह आश्वस्त हूँ और बाक़ी लोग भी मुझसे सहमत होंगे कि आख़िर में हम ही विजेता होंगे

टेलीस्फ़ोरो याकोबेली
फिर वह पूछते हैं कि जानते हो क्यों?

और ख़ुद ही जवाब देते हैं, "क्योंकि हम बुद्धिमान हैं. क्योंकि हम वो ही हैं जैसे हम हैं. हमारा आकलन उसी आधार पर होता है जैसे हम हैं न कि जैसे दिखते हैं."

इस क्लब का प्रतीक चिह्न एक जंगली सुअर है और वहीं लिखा है, "बदसूरती प्रभावशाली है, ख़ूबसूरती दासता है."

आज इस क्लब की सदस्यता 20,000 तक पहुँच चुकी है.

ये क्लब काम करने वाली जगहों पर शारीरिक सुंदरता के अनुसार होने वाले भेदभाव के विरुद्ध अभियान चलाता है.

क्लब बदसूरत लोगों की परेशानियाँ समाज के सामने लाने की कोशिश भी करता है.

क्लब के एक सदस्य का कहना था, "क्लब लोगों को ये दिखाकर मदद करने की कोशिश करता है कि वे शारीरिक रूप से बदसूरत भले ही हों मगर उनमें कई ऐसे गुण भी हैं जो ख़ूबसूरत लोगों के पास नहीं हैं."

याकोबेली की बेटी रॉबर्टा ख़ूबसूरत है मगर वह मानती है कि ख़ूबसूरती कभी-कभी नुक़सानदायक साबित हो जाती है.

वह कहती हैं कि ज़्यादा ख़ूबसूरत लोगों को बनावटी ज़िंदग़ी भी जीनी पड़ती है और इस तरह वे दोहरा काम करते हैं.

इस तरह इस क्लब की स्थापना उसी देश में हुई है जहाँ ख़ूबसूरती को आम तौर पर सबसे ज़्यादा महत्त्व दिया जाता है.
 
 
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