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बुधवार, 13 अगस्त, 2003 को 17:23 GMT तक के समाचार 'मिसाइल तस्करों' पर आरोप
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सबूत अदालत तक ले जाते एफ़बीआई के अधिकारी
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रूसी मिसाइलों की तस्करी करके उन्हें अमरीका में बेचने की साज़िश के सिलसिले में दो लोगों पर आंतकवादियों को सामान उपलब्ध कराने और बिना लाइसेंस के हथियार बेचने का आरोप लगाया गया है.
उन पर आरोप है कि उन्होंने कंधे पर रख कर चलाई जाने वाली मिसाइल बेचने की कोशिश की और माना जा रहा है कि उसका उपयोग किसी अमरीकी व्यवसायिक विमान को गिराए जाने में किया जाना था.
बुधवार को इन तीनों लोगों को अदालत में पेश किया गया.
गिरफ़्तार किए गए तीन लोगों से एक व्यक्ति भारतीय मूल का ब्रितानी नागरिक भी है जिसका नाम हेमंत लखानी बताया जा रहा है.
मामले की सुनवाई 10 मिनट चली.
68 साल के हेमंत लखानी के हाथों में हथकड़ियां बंधीं हुईं थीं और वो पूरी सुनवाई के दौरान ख़ामोश रहे.
 लंदन में लखानी का घर | बताया गया है कि एक अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंट को इन लोगों ने इग्ला मिसाइलें बेचने की कोशिश की थी.
ख़ुफ़िया एजेंट ने ख़ुद को इस्लामी चरमपंथी बताया था और ये लोग उसकी चाल में फँस गए और गिरफ़्तार कर लिए गए.
इन लोगों को बुधवार को अमरीका की न्यूजर्सी अदालत में पेश किया जा रहा है जहाँ इन्हें गिरफ़्तार किया गया था.
ख़तरे
इस रहस्य के खुलने के बाद लोगों में आशंका बढ़ गई है कि आतंकवादी यात्री विमानों को इन छोटी मिसाइलों से आसानी से निशाना बना सकते हैं.
 एयरफ़ोर्स वन को गिराने की योजना थी? | यहाँ तक कहा जा रहा था कि आतंकवादी इन मिसाइलों के सहारे राष्ट्रपति बुश के विमान को भी निशाना बना सकते थे.
लेकिन अमरीका अधिकारियों ने इस तरह की आशंकाओं को दरकिनार कर दिया है और कहा है कि यह इतना आसान नहीं है.
कुछ महीने पहले कीनिया में मोम्बासा में एक विमान पर इसी तरह के मिसाइल से हमला किया गया था.
तब यही कहा गया था कि अज्ञात हमलावर ओसामा बिन लादेन के अल क़ायदा संगठन से जुड़े हुए थे.
गिरफ़्तारी
हेमंत लखानी की गिरफ़्तारी न्यूज़र्सी के एक होटल से की गई जब वे एक पार्सल ले रहे थे जिसके अंदर मिसाइल मौजूद थी.
बताया जा रहा है कि लखानी ने मिसाइल 50 हज़ार पाउंड यानी लगभग 45 लाख रूपए में ख़रीदी थी और मुनाफ़ा लेकर किसी को बेचना चाहते थे.
इस पार्सल को मेडिकल उपकरण बताकर बाल्टीमोर भेजा गया था और लखानी दो दिन पहले ही लंदन से अमरीका के लिए रवाना हुए थे.
उन्हें पकड़ने के इस अभियान में अमरीका, रूस और ब्रिटेन के ख़ुफ़िया एजेंटों ने भूमिका निभाई, पाँच महीनों से इन जासूसों की नज़र लखानी पर थी. |
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