|
|
 |
मंगलवार, 05 अगस्त, 2003 को 02:22 GMT तक के समाचार दे गए जीवनदायी चुंबन
|

डॉक्टर सफ़र की तकनीकों ने अनगिनत जानें बचाईं
|
'जीवनदायी चुंबन' या 'किस ऑफ़ लाइफ़' की तकनीक ईज़ाद करने वाले डॉक्टर पीटर सफ़र का 79 वर्ष की आयु में निधन हो गया है.
अमरीकन हार्ट एसोसिएशन ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि उनका निधन अमरीका में रविवार को हुआ था.
मुँह से साँस फूँककर जान बचाने की तकनीक डॉक्टर सफ़र ने ही बताई थी और उसे 'किस ऑफ़ लाइफ़' का नाम दिया गया.
 जीवनदायी चुंबन की तकनीक भी उन्होंने ही बताई | एसोसिएशन ने कहा कि इस तकनीक के बारे में जानकारी मिलने से अनगिनत लोगों की जान बचाई जा सकी.
डॉक्टर सफ़र को लोग डॉक्टर एबीसी भी कहते थे.
उनका ये नाम अँगरेज़ी भाषा के 'एयरवेज़, ब्रीदिंग और सर्कुलेशन' शब्दों के पहले अक्षरों की वजह से पड़ा था.
दरअसल ये शब्द उनके काम से जुड़े थे जिसमें एयरवेज़ यानी शरीर का वायुमार्ग, ब्रीदिंग यानी साँस लेना और सर्कुलेशन यानी रक्त प्रवाह शामिल था.
जीवन
डॉक्टर सफ़र का जन्म 1920 में ऑस्ट्रिया में हुआ था और वह एक नात्सी शिविर से निकलने में सफल हुए थे.
इसके बाद वह अमरीका जाकर बस गए और पिट्सबर्ग मेडिकल स्कूल में प्रोफ़ेसर बने.
उन्होंने जीवनदायी चुंबन की खोज वहीं की थी.
वैसे तो कहा जाता है कि मुँह से साँस फूँककर जान बचाने की तकनीक का उल्लेख पहले भी बाइबिल में था मगर डॉक्टर सफ़र ने 1950 के दशक में इसकी फिर खोज की और लोगों को बताया.
इससे पहले जिन लोगों की साँस रुक जाती थी उनकी ज़िंदग़ी बचाने के लिए लोग अलग-अलग तरीक़े अपनाते थे.
उनमें लोग गर्म राख से शरीर को झटका देने या किसी बड़े गोल से डिब्बे में शरीर रखकर किसी पहाड़ी से नीचे गिराने तक के तरीक़े का इस्तेमाल करते थे.
फिर 1960 के दशक में लोगों ने डॉक्टर सफ़र की जीवनदायी चुंबन तकनीक को छाती दबाने की तकनीक में मिला दिया.
इसके बाद से इस तरीक़े ने दुनिया भर में हज़ारों लोगों की जान बचाई है. |
|
|
|