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सोमवार, 21 जुलाई, 2003 को 09:08 GMT तक के समाचार गोरखा सैनिक अपील करेंगे
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26 हज़ार गोरखा सैनिक ब्रिटिश सरकार से पेंशन ले रहे हैं
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ब्रिटिश सेना से रिटायर हुए गोरखा सैनिक अपनी तनख्वाह, पेंशन और कार्य परिस्थितियों को लेकर अपील कोर्ट में जा रहे हैं.
उनका आरोप है कि उनके साथ ब्रिटिश सैनिकों की तुलना भेदभाव बरता जाता है.
यह अपील सोमवार को की जा रही है.
मूल रूप से नेपाल के निवासी गोरखा सिपाहियों की मुख्य शिकायत यह है कि उन्हें रिटायर होने के बाद ब्रिटिश सैनिकों की तुलना में कम पेंशन मिलती है.
फरवरी में हाईकोर्ट ने उनकी याचिका को ख़ारिज कर दिया था.
हालांकि न्यायालय ने रक्षा मंत्रालय से कहा था कि वह यह गोरखा सैनिकों को उनके परिवार के साथ रहने देने की संभावनाओं पर विचार करे.
यदि इस मामले का फ़ैसला गोरखा सैनिकों के पक्ष में होता है तो उन्हें मुआवजे के रूप में दो अरब पाउंड यानी कोई पंद्रह अरब रूपए की रकम मिल सकती है.
इस समय ब्रिटिश सेना से रिटायर हुए 26 हज़ार सैनिक पेंशन ले रहे हैं.
मानवाधिकार का मामला
सात पूर्व गोरखा सैनिकों का आरोप है कि ब्रिटिश सरकार ने उनके साथ भेदभाव करके मानवाधिकार का हनन किया है.
जबकि सरकार इस आरोप का खंडन करती है.
इन पूर्व सैनिकों का कहना है कि ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय से जो दस्तावेज हासिल किए हैं उससे साफ़ ज़ाहिर होता है कि ब्रिटिश सैनिकों की तुलना में उनके साथ तनख्वाह, पेंशन और काम करने की परिस्थितियों के मामले में भेदभाव बरता जाता है.
बीबीसी के रक्षा संवाददाता पॉल एडम्स का कहना है कि गोरखा सैनिकों को यह मामला बहुत ज़ोरदार ढंग से पेश करना होगा.
इसी वर्ष फरवरी में हाईकोर्ट के जज ने गोरखा सैनिकों की अपील खारिज करते हुए कहा था कि चूंकि गोरखा सैनिक रिटायरमेंट के बाद नेपाल में रहते हैं और वहाँ जीवन का स्तर और खर्च ब्रिटेन की तुलना में काफ़ी नीचे है इसलिए उनको कम पेंशन मिलना ग़लत नहीं है.
न्यायालय का कहना था कि यह संस्थागत भेदभाव का कोई मामला नहीं है जैसा कि पूर्व गोरखा सैनिक आरोप लगा रहे हैं.
इन पूर्व गोरखा सैनिकों के वकील फ़िल शिनर का कहना है कि यह सरकार के ख़िलाफ़ एक 'टेस्ट केस' है और यदि वे यह मामला जीत जाते हैं तो सरकार को अरबों रूपए की क्षतिपूर्ति करनी होगी. |
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