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मंगलवार, 15 जुलाई, 2003 को 17:39 GMT तक के समाचार चैटरूम के ज़रिए प्रेम संबंध
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इंटरनेट पर मुलाक़ात प्रेम संबंधों में बदल गई
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इंटरनेट से अगर बहुत से फ़ायदे हैं तो कुछ नुक़सान भी हैं.
अगर इंटरनेट के इस्तेमाल पर नज़र न रखी जाए तो यह ख़ास कर बच्चों के लिए बहुत ख़तरनाक साबित हो सकता है.
ये ख़तरा सबसे ज़्यादा चैटरूम में होता है जहाँ बहुत से लोग नए दोस्त बनाने और मौज-मस्ती करने के इरादे से अपना वक़्त गुज़ारते हैं.
चैटरूम की ख़ास बात ये होती है कि वहाँ कोई दूसरा आपके बारे में कुछ नहीं जान सकता और आप चाहें तो अपनी पहचान छुपा सकते हैं.
कुछ ऐसा ही हुआ है ब्रिटेन की 12 साल की शेवॉन पेनिंगटन के साथ. शेवॉन एक दिन में 11-11 घंटे इंटरनेट पर बिताती थीं.
माता-पिता की मुश्किल
माता पिता को बच्ची की आदत सुधारने के लिए नियम बनाना पड़ा कि वो दिन भर में पाँच घंटे से ज़्यादा कंप्यूटर के सामने नहीं बैठेंगी.
लेकिन शायद तब तक देर हो चुकी थी. इस दौरान एक चैटरूम में शेवॉन की मुलाक़ात हो गई 31 साल के एक आदमी टोबी स्टूडबकर से.
12 साल की बच्ची अमरीकी फ़ौज में काम कर चुके इस आदमी से जल्दी ही प्रभावित हो गई.
इस डर से कि वो आदमी उसे बच्ची समझ कर नकार न दे, लड़की ने अपनी उम्र ज़्यादा बता दी.
कहा, मैं 19 साल की कॉलेज छात्रा हूँ. तरकीब चल गई और दोनों ने आपस में चैटरूम और ईमेल के ज़रिए संपर्क बनाए रखा.
लड़की अपनी सहेलियों को शान से बताती, मेरा बॉयफ़्रेंड एक अमरीकी है.
ग़ज़ब तो तब हुआ जब दोनों पिछले शनिवार को पहली बार मिले और ख़बरें मिलीं कि पैरिस चले गए.
हालाँकि उनके पते-ठिकाने के बारे में ब्रिटेन और फ्रांस की पुलिस कोशिश कर रही है.
टोबी के परिवार वालों का कहना है कि वो समझते थे कि वह एक जवान महिला से मिलने जा रहा है.
लेकिन अब तो देर हो चुकी है. 12 साल की बच्ची शेवॉन न जाने किस हाल में है.
उम्र कम या ज़्यादा
कहावत है कि आम तौर पर महिलाएँ और लड़कियाँ अपनी उम्र कम बताती हैं लेकिन देखा गया है कि इंटरनेट या चैटरूम में लड़के-लड़कियाँ अपनी उम्र ज़्यादा बताते हैं ताकि वहाँ उन्हें लोग गंभीरता से लें और वो भी नौजवानों के साथ हँसी मज़ाक और मस्ती कर सकें.
कई ऐसे मामले भी सामने आए हैं जिनमें उमरदराज़ लोगों ने अपनी उम्र कम बता कर बच्चों को बहकाने की कोशिश की है.
फ़िलहाल यह तो पता नहीं कि दुनिया भर में ऐसे कुल कितने मामले सामने आए हैं लेकिन चैटरूम के ज़रिए होने वाले ऐसे मामलों पर रोक के लिए ब्रिटेन में सरकार ने एक विशेष कार्य दल बनाया है.
इस कार्यदल में पुलिस, इंटरनेट मुहैया कराने वाली कंपनियाँ और बच्चों के लिए काम करने वाली संस्थाएँ शामिल हैं.
कुछ नए क़ानून भी बनाए जा रहे हैं. लेकिन जानकारों का मानना है कि ऐसे मामलों पर क़ाबू पाने के लिए सबसे ज़्यादा ज़रूरी है - बच्चों और नौजवानों को ये समझाना कि इंटरनेट पर मस्ती और मज़ाक़ की सीमा कहाँ होनी चाहिए. |
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