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सोमवार, 14 अप्रैल, 2003 को 19:34 GMT तक के समाचार इराक़ की धरोहर लुटी
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बग़दाद के राष्ट्रीय संग्रहालय को लोग लूट ले गए
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हज़ारों साल पहले आदमी के हाथ के लिखे शुरूआती शब्द, वो बर्तन जिनमें ईसा मसीह के जन्म से तीन हज़ार वर्ष पहले लोगों ने खाना खाया होगा या फिर वो औज़ार जो किसी मशीन की कल्पना से हज़ारों वर्ष पुराने हैं.
अभी तक लगभग एक लाख 70 हज़ार कलाकृतियों की सूची हमें संग्रहालयों के प्रमुखों ने दी है. लेकिन नुक़सान इससे कहीं अधिक हो सकता है | | कॉलिन कैसर,यूनेस्को | एक लंबी सूची ऐसी चीज़ों की है जो न सिर्फ़ इराक़ की बल्कि पूरी दुनिया की दुर्लभ धरोहर है और अब लुट चुकी है.
इराक़ मामलों के यूनेस्को के प्रभारी डॉक्टर कॉलिन कैसर ने बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के साथ एक विशेष बातचीत में बताया कि इससे पहले सांस्कृतिक धरोहरों की तबाही इतने बड़े पैमाने पर कभी नहीं हुई.
वे कहते हैं, “अभी तक लगभग एक लाख सत्तर हज़ार कलाकृतियों की सूची हमें संग्रहालयों के प्रमुखों ने दी है. हो सकता है कि नुक़सान इससे कहीं अधिक हो.”
चिंता
यूनेस्को के महानिदेशक कोईशिरो मासाकुरा ने अमरीकी और ब्रितानी अधिकारियों से तत्काल ठोस क़दम उठाने को कहा है.
इसके अलावा, लूटी गई कलाकृतियों की तस्करी को रोकने लिए पड़ोसी देशों और इंटरपोल को भी आगाह किया गया है.
 यूनेस्को के प्रभारी कॉलिन कैसर | ऐसा नहीं है कि सिर्फ़ इराक़ी लोगों ने ही लूट मचाई हो.
यूनेस्को के अधिकारियों का मानना है कि लड़ाई शुरू होने से पहले सद्दाम हुसैन के लोगों कलाकृतियों को छिपाना शुरू कर दिया था.
और अब उन कलाकृतियों को खोज पाना उतना ही मुश्किल है जितना लूटी गई कलाकृतियों को वापस पाना.
डॉक्टर कैसर कहते हैं, “संग्रहालयों के निदेशक अब हमें बता सकते हैं कि कितनी कलाकृतियाँ हटाकर कहीं और रखी गईं थीं. लोगों ने सद्दाम के महलों से भी कलाकृतियों को लूटा है.”
अब क्या?
जब यूनेस्को के अधिकारियों से पूछा गया कि कलाकृतियों को वापस हासिल करने की क्या योजना है तो उन्होंने बताया कि सैनिक अधिकारी और कस्टम विभाग जितनी चीज़ें बरामद कर सकेगा वही वापस मिलेंगी.
डॉक्टर कैसर ने उम्मीद जताई कि अगर रेडियो पर अपील की जाए तो शायद कुछ चीज़ें वापस आ जाएँ.
उन्होंने कहा, “इराक़ी लोगों को अपनी धरोहर पर बहुत गर्व है, हमारे पास लोगों की नेकनीयती पर विश्वास करने के अलावा कोई रास्ता नहीं है.”
निजी बातचीत में यूनेस्को के अधिकारी भी स्वीकार करते हैं कि दस प्रतिशत से ज़्यादा कलाकृतियों की वापसी की उम्मीद करना मुश्किल है.
मेसोपोटामिया, असीरिया और बेबीलोनिया जैसी महान सभ्यताओं की जन्मभूमि इराक़ में अब लोगों मानव उत्कर्ष की गाथा जानने के लिए शायद तस्वीरों से काम चलाना पड़ेगा. |
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