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मंगलवार, 25 फरवरी, 2003 को 14:03 GMT तक के समाचार लंदन का आकर्षण घटा
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लंदन की महँगाई दूसरे शहरों के लिए वरदान बन रही है
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इसमें कोई शक नहीं है कि लंदन एक पुराना शहर है और दुनिया के सपनों का शहर भी. और यह भी की लंदन दुनिया का सबसे महँगा शहर भी कहा जाता है.
और यही महँगाई अब लंदन की अलोकप्रियता का कारण बनती जा रही है.
ख़ासतौर से छात्रों में लंदन का आकर्षण इसलिए कम हो रहा है क्योंकि उनके रहन-सहन और पढ़ाई पर इतना ख़र्च आता है कि बहुत से छात्र या तो पढ़ाई ही छोड़ देते हैं या उनके पास एक और रास्ता होता है ब्रिटेन के किसी अन्य शहर में पढ़ाई करना.
अब ज़्यादातर छात्र दूसरा रास्ता ही अपना रहे हैं यानि लंदन को छोड़कर अन्य शहरों की तरफ़ रूख़ कर रहे हैं.
बाज़ी किसकी
लोकप्रियता और आकर्षण के इस संघर्ष में लंदन से बाज़ी मारी है मेनचेस्टर ने. लंदन में अगर छात्रों की संख्या घटी है तो मेनचेस्टर में बढ़ी है.
छात्र संघों के नेताओं का कहना है कि लंदन से छात्र इसलिए डरने लगे हैं कि उनका रहन सहन और पढ़ाई का ख़र्च कहीं उन्हें क़र्ज़ तले ना दबा दे.
मेनचेस्टर विश्वविद्यालय में इस साल क़रीब 45 हज़ार अर्ज़ियाँ दाख़िल की गईं जोकि पिछले साल के मुक़ाबले बाईस प्रतिशत की वृद्धि है.
यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि ब्रिटेन का उच्च शिक्षा में सभी पाठ्यक्रमों में पर वर्ष बढ़ोत्तरी का औसत सिर्फ़ 1.8 प्रतिशत है.
मेनचेस्टर विश्वविद्यालय में विदेशी छात्रों की संख्या पिछले साल के मुक़ाबले 42 प्रतिशत बढ़ी है.
दूसरी तरफ लंदन में लगभग सभी विश्वविद्यालयों में दाखिले की अर्जियों में क़रीब 14 प्रतिशत की कमी आई है.
महँगाई
इसकी मुख्य वजह यही बताई जा रही है कि छात्र सस्ती आवास सुविधा और पढ़ाई पर कम ख़र्च की तलाश में लंदन से बाहर जाना पसंद कर रहे हैं. शायद यही उनकी पसंद नहीं बल्कि मजबूरी है.
ब्रिटेन के राष्ट्रीय छात्रसंघ के अध्यक्ष मेंडी टेलफोर्ड कहते हैं कि इससे साफ़ झलकता है कि छात्रों को क़र्ज़ का डर उनकी शिक्षा प्राथमिकताओं पर किस तरह से असर डाल रहा है.
वह कहते हैं कि ज़्यादा चिंता की बात ये है कि शिक्षा शुल्कों में बढ़ोत्तरी करने के सरकार के फ़ैसले से छात्रों की चिंताएं और मुश्किलें और बढ़ेंगी.
नोटिंघम विश्वविद्यालय में दाख़िले के लिए 48 हज़ार अर्ज़ियाँ दी आईं जो कि पिछले साल के मुक़ाबले चार प्रतिशत ज़्यादा थीं.
जबकि लीड्स विश्वविद्यालय में 47 अर्ज़ियाँ दाख़िल हुईं और यह पिछले साल के मुक़ाबले पाँच प्रतिशत की वृद्धि थी.
लंदन के बाहर कुछ अन्य विश्वविद्यालयों में भी दाखिले की अर्ज़ियों में इसी तरह की बढ़ोत्तरी देखी गई है.
जबकि लंदन में लगभग सभी विश्वविद्यालयों में दाख़िले की अर्ज़ियों में काफ़ी गिरावट देखी गई है.
लंदन के प्रतिष्ठित स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पोलिटिकल साइंस, यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन, इम्पीरियल कॉलेज, वेस्टमिन्सटर यूनिवर्सिटी, वग़ैरा सभी में अर्ज़ियों की संख्या गिरी है.
ग्रीनिच यूनिवर्सिटी में 12 प्रतिशत, साउथ बैंक यूनिवर्सिटी में 13 प्रतिशत और यूनिवर्सिटी ऑफ नोर्थ लंदन में 14 प्रतिशत गिरावट देखी गई है.
हालाँकि क्वीन मैरी, यूनिवर्सिटी ऑफ़ लंदन, और किंग्स कॉलेज में कुछ बढ़ोत्तरी भी देखी गई है.
क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी के प्रवक्ता के अनुसार यह बढ़ोत्तरी इसलिए हुई है क्योंकि बहुत से छात्र पढ़ाई के दौरान अपने परिवारों के साथ ही रहना पसंद कर रहे हैं. |
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