|
|
 |
रविवार, 23 फरवरी, 2003 को 07:13 GMT तक के समाचार यौन शिक्षा की मुश्किलें
|

बच्चों मे यौन शिक्षा के बारे में जागरूकता कैसे बढ़ाई जाए
|
ब्रिटेन में किशोर उम्र के लड़कियों और लड़कों को यौन शिक्षा देने के बारे में कार्यक्रम तो शुरु कर दिए गए हैं लेकिन शिक्षकों का सामने ऐसी मुश्किलें आ रही हैं कि आख़िर बच्चों को कैसे समझाया जाए.
बच्चे यौन संबंधों के बारे में ऐसे अटपटे सवाल पूछते हैं जिनका शिक्षकों को कोई जवाब देते नहीं बनता.
बच्चे ख़ासतौर से अप्राकृतिक यानि पुरुष और पुरुष के बीच यौन संबंधों और मुख यौन संबंधों के बारे में बहुत सवाल पूछते हैं.
इन सवालों से ब्रिटेन के एक यौन शिक्षा कार्यक्रम की प्रासंगिकता पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं.
मसलन एक्ज़ेटेर विश्वविद्यालय ने कुछ समय पहले किशोरों में यौन शिक्षा के बारे में एक कार्यक्रम शुरु किया गया था जो अब क़रीब 150 स्कूलों में चल रहा है.
 यौन चर्चा में झिझक तो होती है | इस कार्यक्रम को सरकार के स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग से सहायता दी जाती है.
पूरे यूरोप में यह इस तरह का बिल्कुल पहला कार्यक्रम था जिसका मक़सद किशोर लड़कियों के माँ बनने के मामलों में कमी लाना था.
ब्रिटेन ऐसा देश है जहाँ किशोर लड़कियों के माँ बनने के सबसे ज़्यादा मामले होते हैं.
अटपटे सवाल
डोंकास्टर की एक शिक्षका लिन्डा ब्राइन कहती हैं कि इस यौन शिक्षा कार्यक्रम से किशोरों में कोई जागरूकता नहीं बनी है उल्टे उन्हें यह समझाना ही मुश्किल है कि 16 साल से कम उम्र में यौन संबंध बनाना ग़ैरक़ानूनी है.
लिन्डा की मुख्य चिता यही है कि किशोरों के यौन शिक्षा के बारे में पूछे जाने वाले अटपटे सवालों के जवाब किस तरह से दिए जाएं.
वह एक उदाहरण सामने रखती हैं.
एक चौदह साल की लड़की पूछती है, "वीर्य का स्वाद कैसा होता है."
एक पंद्रह साल का लड़का सवाल पूछता है, "पुरुष और पुरुष के बीच यौन संबंध कैसे क़ायम किए जाते हैं. क्या एक महिला और पुरुष भी इसी तरह के यौन संबंध क़ायम कर सकते हैं."
लिन्डा ख़ुद से ही सवाल करती हैं कि इस उम्र के बच्चे ऐसे सवाल क्यों पूछते हैं.
लिन्डा ब्राइन एक रोमन कैथोलिक ईसाई हैं और दो बच्चों की माँ हैं. वह एक कुशल विज्ञान शिक्षिका हैं और कहती है कि किशोरों में यौन शिक्षा देते समय वह ख़ुद भी पूरी तरह मुतमईन नहीं होती हैं.
लिन्डा कहती हैं, "यौन शिक्षा के कार्यक्रम में हम बच्चों को ऐसी जानकारी देने की कोशिश करते हैं जिसके बारे में उन्हें कुछ भी पता नहीं होता है. इसलिए स्थिति कुछ अटपटी सी हो जाती है."
सही वक़्त
इस यौन शिक्षा का असल मक़सद किशोरों में यह जागरूकता पैदा करना है कि वे यौन संबंध बनाने में जल्दबाज़ी ना करें क्योंकि आगे चलकर उन्हें अपने इस काम के लिए पछताना भी पड़ सकता है.
इस कार्यक्रम के मैनेजर जॉन रीज़ कहते हैं कि इसके तहत बच्चों को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया गया है कि 16 वर्ष से कम उम्र में यौन संबंध क़ायम करना क़ानून के ख़िलाफ़ है.
किशोरों को यह समझाने की कोशिश की जाती है कि बेशक भावनात्मक संबंध ज़रूर रखें लेकिन शारीरिक संबंधों से बचने की कोशिश करें क्योंकि इससे लड़कियाँ गर्भवती हो सकती हैं जो उनके लिए उस उम्र में उपयुक्त नहीं है.
यह कार्यक्रम कहता है, "आप हाथ में हाथ डालकर टहल सकते हैं, एक दूसरे का चुंबन ले सकते हैं और आँखों के ज़रिए प्रेम की अभिव्यक्ति कर सकते हैं लेकिन शारीरिक संबंध आपके हालात को जटिल बना सकते हैं."
पारिवारिक मूल्यों को बढ़ावा देने में सक्रिय रोबर्ट व्हेलन कहते हैं कि इस यौन शिक्षा कार्यक्रम में कुछ अच्छी बातें हैं.
"मैं जानता हूँ कि इस कार्यक्रम के ज़रिए किशोर गर्भधारण को कम करने की कोशिश की जा रही है लेकिन कार्यक्रम कुछ मामलों में शायद अपनी हद पार कर गया है."
सरकारी दिशा निर्देशों ने कहा गया है कि यौन शिक्षा कार्यक्रम का उद्देश्य किशोरों में पारिवारिक मूल्य विकसित करना और जीवन में विवाहित जीवन और भावनात्मक रूप से स्थाई संबंधों का महत्व समझाना है जिससे उनमें प्रेम के लिए इज़्ज़त पैदा हो.
"यह बच्चों में यौन क्रियाओं और यौन स्वास्थ्य के बारे में भी जागरूकता करने के लिए है. इस कार्यक्रम का मक़सद किशोरों में यौन गतिविधियाँ बढ़ाना क़तई नहीं है." |
|
|
|