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गुरुवार, 20 फरवरी, 2003 को 21:55 GMT तक के समाचार ब्रिटेन की हिंदी फ़िल्म चर्चा में
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वॉरियर का नायक शांति की तलाश में एक लंबी यात्रा करता है
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ब्रिटेन में बनी हिंदी फ़िल्म 'द वॉरियर' को बाफ़्टा अवार्ड के लिए नामांकित किया गया है.
बाफ़्टा ब्रिटेन का महत्वपूर्ण पुरस्कार माना जाता है.
आसिफ़ कपाड़िया स्वीकार करते हैं कि उन्हें उम्मीद से कहीं अधिक सफलता हाथ लगी है.
कपाड़िया का कहना है,"यदि आप पहली बार फ़िल्म बना रहे हैं तो आपको पता नहीं लगता कि यह प्रक्रिया कितनी जटिल होती है."
"और मुझे तो इसका अंदाज़ भी नहीं था कि यह काम इतना कठिन होगा."
वॉरियर को तीन श्रेणियों के लिए नामांकित किया है.
इसे ब्रिटेन की सर्वश्रेष्ठ फीचर फ़िल्म, किसी निर्देशक की पहली फ़िल्म और ग़ैर-अँगरेज़ी भाषा की सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म के अवार्ड के लिए नामांकित किया गया है.
इसके पहले इस फ़िल्म की भाषा को लेकर उठे विवाद के बाद ऑस्कर पुरस्कार के लिए नामांकन रद्द कर दिया गया था.
वॉरियर को ब्रिटेन की ओर से सर्वश्रेष्ठ विदेशी फ़िल्म श्रेणी में भेजा गया था.
फ़िल्म का नामांकन इसलिए ख़ारिज कर दिया गया था क्योंकि माना गया था कि हिंदी ब्रिटेन की भाषा नहीं है.
ऑस्कर समारोह के नियमों के अनुसार विदेशी फ़िल्मों की श्रेणी में किसी देश की मुख्य आधिकारिक भाषा में बनी फ़िल्म ही शामिल हो सकती है.
आसिफ़ कपाड़िया ब्रिटेन में पैदा हुए हैं और यह उनकी पहली फ़ीचर फ़िल्म है.
यह फ़िल्म भारतीय सामंतवाद के बारे में है.
वॉरियर की कहानी राजस्थान के रेगिस्तान से शुरु होती है और हिमालय के पर्वतों तक जाती है.
अपनी हिंसक ज़िदगी से बचने के लिए इरफ़ान ख़ान शांति की खोज में निकलता है.
एक कबायली नेता को उसके जाने की ख़बर लगती है और वह अपने आदमियों को उसका सर कलम कर लाने का आदेश देता है. |
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