BBC World Service LogoHOMEPAGE | NEWS | SPORT | WORLD SERVICE DOWNLOAD FONT | Problem viewing?
BBCHindi.com

पहला पन्ना
भारत और पड़ोस
खेल और खिलाड़ी
कारोबार
विज्ञान
आपकी राय
विस्तार से पढ़िए
हमारे कार्यक्रम
प्रसारण समय
समाचार 
समीक्षाएं 
आजकल 
हमारे बारे में
हमारा पता
वेबगाइड
मदद चाहिए?
Sourh Asia News
BBC Urdu
BBC Bengali
BBC Nepali
BBC Tamil
 
BBC News
 
BBC Weather
 
 आप यहां हैं: 
 ताज़ा समाचार
शनिवार, 10 अगस्त, 2002 को 15:53 GMT तक के समाचार
बहादुरशाह ज़फ़र के वंशज
आख़िरी मुग़ल सम्राट के बस कुछ नामलेवा ही बाक़ी हैं
आख़िरी मुग़ल सम्राट के बस कुछ नामलेवा ही बाक़ी हैं

अतुल प्रभाकर

अंतिम मुग़ल सम्राट बहादुरशाह ज़फ़र के वंशजों पर बनी पहली फ़िल्म 'द लिविंग मुग़ल्स' उनकी चौथी पीढ़ी के जीवित बचे परिवारजनों की कहानी है.

हैदराबाद में बसी अस्सी वर्षीया लैला उम्मेहानी, उनके बेटों और ख़ानदान के अन्य लोगों के आसपास घूमती यह कहानी उनकी ज़िंदगी, रहन-सहन और उनके दुख दर्द को चित्रित करती है.


बेगम लैला उम्मेहानी एक पहचान चाहती हैं
वर्ष 1857 से 2002 के बीच के 145 वर्षों में इतिहास के रंगमंच से मुग़ल लगभग पूरी हद तक खो ही गए थे.

इस बीच हुए सांस्कृतिक और राजनीतिक परिवर्तनों ने भारतीय समाज का चेहरा पूरी तरह बदल दिया और इन परिवर्तनों के बीच बहादुरशाह ज़फ़र के वंशजों की ज़िंदगी भी कठिनाइयों से भरी रही.

ब्रितानी राज के दौरान उनका सब कुछ लुट गया और स्वतंत्र भारत में आज के यह मुग़ल हैदराबाद में किराए के मकान में रह रहे हैं.

बेगम लैला उम्मेहानी के बड़े बेटे बासठ वर्षीय ज़ियाउद्दीन तूसी का कहना है, "सरकार संग्रहालयों, मक़बरों और जानवरों की लुप्त होती प्रजातियों की चिंता तो करती है लेकिन मुग़ल सम्राट के चलते-फिरते वंशजों की उसे कोई चिंता नहीं है".

फ़िल्म में लैला उम्मेहानी अपने परिवार और अपने पूर्वजों की कहानी सुनाती हैं.


सरकार संग्रहालयों और मक़बरों की चिंता तो करती है लेकिन मुग़ल सम्राट के चलते-फिरते वंशजों की उसे कोई चिंता नहीं है

ज़ियाउद्दीन तूसी
वर्ष 1857 में आज़ादी की पहली लड़ाई मे शरीक होने के लिए ब्रिटिश साम्राज्य ने बहादुरशाह ज़फ़र को बर्मा निर्वासित कर दिया था.

उनके 22 बेटों में से एक के पोते मिर्ज़ा प्यारे का जन्म हैदराबाद में हुआ और अस्सी वर्षीया लैला उम्मेहानी उन्हीं मिर्ज़ा प्यारे की बेटी हैं.

उन्हें अपने पूर्वजों पर नाज़ है लेकिन उन्हें दुख सिर्फ़ इस बात का है कि उन्हें अपनी पहचान ख़ुद लोगों को बतानी पड़ती है.

भारत की इस जीती जागती धरोहर को, जो गुमनामी के अँधेरे में खो गई थी, सामने लाकर फ़िल्म निर्माता अरिजीत गुप्ता को बेहद संतोष है.

उनका कहना था कि फ़िल्म को भव्य बनाने की बजाय वह मुग़लकाल की गुम हो चुकी चार पीढ़ियों को एक कहानीकार की तरह पर्दे पर लाए हैं.
 
 
ताज़ा समाचार
बग़दाद में दो अमरीकी मरे
फ़लस्तीन में फिर सत्ता संघर्ष?
हेडेन ने तोड़ा लारा का रिकॉर्ड
नाथन एस्टल ने शतक बनाया
तस्वीर भेजी और चकमा दिया
पूर्व गोरखा सैनिक मुक़दमा हारे
कैदियों के हक में उठी आवाज़







BBC copyright   ^^ हिंदी

पहला पन्ना | भारत और पड़ोस | खेल और खिलाड़ी
कारोबार | विज्ञान | आपकी राय | विस्तार से पढ़िए
 
 
  कार्यक्रम सूची | प्रसारण समय | हमारे बारे में | हमारा पता | वेबगाइड | मदद चाहिए?
 
 
  © BBC Hindi, Bush House, Strand, London WC2B 4PH, UK