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गुरुवार, 25 जुलाई, 2002 को 11:21 GMT तक के समाचार तलाक़ के लिए बलात्कार
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कई महिलाएँ शारीरिक या मानसिक उत्पीड़न का शिकार होती हैं
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भारत के पश्चिमी राज्य राजस्थान में अधिकारियों का कहना है कि एक व्यक्ति को इस आधार पर गिरफ़्तार किया गया है कि उसने अपनी पत्नी से तलाक़ पाने के लिए उसका बलात्कार करवाया.
अलवर ज़िले के पुलिस अधीक्षक बीआर ग्वाला ने बीबीसी को बताया कि यह घटना गोविंदगढ़ ज़िले में हुई.
जंगीर ने अपने भाई और भतीजे से अपनी पत्नी का बलात्कार करवाया ताकि वह उससे तलाक़ हासिल कर सके | | पुलिस अधीक्षक | जंगीर सिंह को उसकी पत्नी की शिकायत पर गिरफ़्तार कर लिया गया है.
उनका कहना था, "जंगीर ने अपने भाई और भतीजे से अपनी पत्नी का बलात्कार करवाया ताकि वह उससे तलाक़ हासिल कर सके".
पुलिस का कहना है कि जंगीर ने अपनी पत्नी का बलात्कार होते समय उसकी पूरी फ़िल्म बनाई.
बाद में उसने अपनी पत्नी को वह फ़िल्म दिखाई और उसे धमकी दी कि या तो वह तलाक़ के लिए राज़ी हो जाए वर्ना वह यह फ़िल्म लोगों को दिखाएगा.
जंगीर की शादी को दस वर्ष हो चुके थे और अब वह जेल में है.
 कई महिलाएँ शर्म की वजह से इस तरह की घटनाएँ छिपा लेती हैं | पुलिस का कहना है कि वह अपनी पत्नी के चरित्र पर शक किया करता था और तलाक़ चाहता था.
इस दम्पत्ति के दो बच्चे हैं जिनमें से एक सुन नहीं पाता है.
पुलिस का कहना है कि उन्होंने इस कांड में शामिल जंगीर के भाई और भतीजे को गिरफ़्तार कर लिया है लेकिन जिस कैमेरामैन ने यह फ़िल्म खींची थी वह लापता है.
पुलिस अधीक्षक ग्वाला का कहना है कि बलात्कार की शिकार महिला के लिए इससे उबरना आसान नहीं होगा क्योंकि उसके परिवार में उसकी माँ के अलावा और कोई नहीं है.
उन्होंने कहा, "यह न केवल भारतीय क़ानून के ख़िलाफ़ है बल्कि अनैतिक भी है".
उनका कहना था कि यह दम्पत्ति आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग से संबद्ध हैं.
भारत में प्रति छह घंटे में कहीं न कहीं एक महिला या तो जला कर या पीट-पीट कर मार दी जाती है | | एक रिपोर्ट | भारत की जानी मानी वकील और महिला कार्यकर्ता इंदिरा जयसिंह द्वारा जुटाए गए कुछ आँकड़ें चौंका देने वाले हैं.
उनके अनुसार भारत में प्रति छह घंटे में कहीं न कहीं एक महिला या तो जला कर या पीट-पीट कर मार दी जाती है या उसे आत्महत्या करने पर मजबूर कर दिया जाता है.
विश्लेषकों का कहना है कि यह एक चिंताजनक बात है कि अभी भी समाज में उन पुरुषों के ख़िलाफ़ कोई सख़्त क़दम उठाए जाने का प्रावधान नहीं है जो अपनी पत्नियों का शारीरिक या मानसिक रूप से उत्पीड़न करते हैं.
उनका कहना है कि महिलाएँ भी सामाजिक वर्जना के डर से इस तरह के अपराधों पर पर्दा डाल लेती हैं और उन्हें सार्वजनिक नहीं करती हैं. |
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