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शनिवार, 20 जुलाई, 2002 को 10:27 GMT तक के समाचार कैंसर का ख़तरा घटाइए
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स्तन कैंसर से बचने का तरीका
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दुनिया भर की हज़ारों महिलाएँ अपने बच्चों को अधिक समय तक स्तनपान कराके स्तन कैंसर के ख़तरे से बच सकती हैं.
शुक्रवार को ब्रिटेन कैंसर संस्था के प्रकाशित किए गए नए शोध से पता चला है कि अगर स्तनपान एक वर्ष और करवाया जाए तो कैंसर का ख़तरा लगभग चार प्रतिशत तक घट जाता है.
साथ ही हर बच्चे के जन्म से भी यह ख़तरा घटता है.
हालाँकि इस शोध के अनुसार यह रोग विकसित देशों में अधिक है, लेकिन भारत के महानगरों में भी स्तन कैंसर के मामले अब तेज़ी से सामने आ रहे हैं.
इस शोध के अनुसार ब्रिटेन जैसे देश में अगर स्तनपान कराने का औसत समय छह महीने बढ़ जाए तो हर वर्ष स्तन कैंसर के सामने आने वाले लगभग एक हज़ार मामले रोके जा सकेंगे.
ब्रिटेन में हर वर्ष स्तन कैंसर की वजह से सैंकड़ों मौतें हो रही हैं.
कम समय तक स्तनपान और कम बच्चे, यह स्तन कैंसर के मुख्य कारण हैं | | प्रो बेराल | लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिटेन में स्तनपान करवाने वाली महिलाओं की संख्या बहुत कम है, क्योंकि इसकी शुरुआत के लिए उन्हें पर्याप्त सहयोग नहीं मिलता.
ब्रिटेन की एक स्वयंसेवी संस्था की मुख्य अधिकारी बेलिंडा फिलिप्स का कहना है कि बच्चे के जन्म के छह महीने बाद फ़िलहाल इस देश में औसतन पाँच में से केवल एक महिला ही स्तनपान करवाती है.
बेलिंडा फिलिप्स के अनुसार "यह स्पष्ट है कि ब्रिटेन की महिलाओं को अभी तक स्तनपान के बारे में न तो सही जानकारी है और न ही इसके लिए उन्हें कोई समर्थन है."
विकासशील देश
इस शोध के अनुसार विकासशील देशों में स्तन कैंसर का ख़तरा कम है, क्योंकि इन देशों में माँ अधिक समय तक स्तनपान करवाती हैं.
विकासशील देशों में स्तनपान की औसत अवधि दो वर्ष है. साथ ही एक महिला इन देशों में अधिक बच्चों को जन्म देती है.
विकसित देशों में यह संख्या दोनों ही क्षेत्रों में कम है.
इसीलिए ब्रिटेन जैसे विकसित देशों में अब यह बीमारी कैंसर की सबसे गंभीर किस्म मानी जाती है.
इस शोध को करने वाले प्रोफेसर वेलयरी बेराल के शब्दों में "कम समय तक स्तनपान और कम बच्चे, यह स्तन कैंसर के मुख्य कारण हैं".
लेकिन भारत के महानगरों में सबसे आम कैंसर अब स्तन कैंसर ही है, क्योंकि शहरीकरण का असर लोंगों के रहन-सहन पर पड़ रहा है.
ख़ासतौर पर मुंबई और दिल्ली में इस कैंसर के मामले सामने आ रहे हैं. |
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