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शुक्रवार, 05 जुलाई, 2002 को 13:33 GMT तक के समाचार 'डॉलर को गिरने से रोकना होगा'
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होर्स्ट कोलर
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अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ़ के अध्यक्ष होर्स्ट कोलर ने कहा है कि लगातार डगमगाते डॉलर को संभालने के लिए पूरी दुनिया के केंद्रीय बैंकों को मिलकर कोशिश करनी पड़ सकती है.
ऐसी दुनिया नहीं चल सकती जिसमें कुछ लोग अंधाधुंध मुनाफ़ा कमाएं और फिर अचानक मुद्राकोष और सरकारों को उसकी भरपाई करनी पड़े | | होर्स्ट कोलर |
फ़ाइनेंशियल टाइम्स अख़बार को दिए एक इंटरव्यू में कोलर ने कहा कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में डॉलर की कीमत इसी बेतरतीब अंदाज़ में गिरती रही तो "हस्तक्षेप न करना सही नहीं होगा."
पिछले कुछ महीनों में डॉलर करीब दस प्रतिशत गिरकर करीब करीब यूरो के बराबर कीमत पर पहुंच गया है.
लेकिन अमरीकी प्रशासन मुद्रा बाज़ार में हस्तक्षेप न करने का पक्षधर रहा है.
हालांकि सितंबर 2000 में बिल क्लिंटन के शासनकाल में अमरीकी वित्त मंत्रालय यूरो की कीमत बढ़ाने के लिए साझा कार्रवाई पर राज़ी हो गया था. उस वक्त एक यूरो की कीमत करीब 0.84 अमरीकी डॉलर हो गई थी.
अमरीकी केंद्रीय बैंक फ़ेडरल रिज़र्व के प्रमुख एलन ग्रीनस्पैन 16 जुलाई को अमरीकी संसद के सामने पेश होनेवाले हैं. संभावना है कि अपने बयान में वे डॉलर की बदहाली पर भी चर्चा करेंगे.
ख़तरे में अर्थव्यवस्था
अमरीकी अर्थव्यवस्था की नैया तो पहले ही हिचकोले खाती नज़र आ रही थी अब पूरी दुनिया के शेयर बाज़ारों में गिरावट से उसके सुधरने की उम्मीद भी कम होती जा रही है.
और इसी के साथ डॉलर की मज़बूती की संभावना भी सवालों के घेरे में आती जा रही है.
और अमरीका अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अपने इतिहास का सबसे बड़ा घाटा भी उठाने जा रहा है.
डॉलर के गिरने का नुकसान उन सभी को होगा जो अमरीका को निर्यात करते हैं क्योंकि अमरीका में उनका सामान महंगा हो जाएगा और इसकी वजह से उनके अपने देशों में भी महंगाई बढ़ेगी.
कोलर ने आशंका जताई कि यह ख़तरा भी है कि वित्तीय बाज़ार "इस समस्या को बढ़ाचढ़ाकर आंकने के चक्कर में ख़ुद ही तबाही का कारण बन जाएं."
लेकिन उन्होंने माना कि पांच में एक गुंजाइश यह भी है कि पूरी दुनिया में आर्थिक मंदी शुरू हो जाए.
ऐसी आशंका तब है जब विकसित देशों के शेयर बाज़ारों में और गिरावट जारी रहने के साथ-साथ ब्राज़ील और तुर्की जैसे विकासशील देश मुद्राकोष को अपने कर्ज़ की किश्तें न चुका पाएं.
और उन्होंने चेतावनी दी कि अतीत में हुई आर्थिक ज़्यादतियों ने सरकारों और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के लिए बहुत सी मुसीबतें खड़ी कर दी हैं.
कोलर ने कहा "ऐसी दुनिया कैसे चल सकती है जिसमें पहले तो अंधाधुंध मुनाफ़ा कमाया जाए और फिर अचानक मुद्राकोष और सरकारों को इसकी भरपाई करनी पड़े."
गलतियां मानीं
कोलर ने माना कि मुसीबत में फंसे देशों को फ़ौरी आर्थिक मदद पहुंचानेवाले उनके संगठन ने अतीत में इस बात पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया कि गरीबों के हितों की रक्षा के लिए कोई सामाजिक सुरक्षा तंत्र तैयार किया जाए.
मुद्राकोष की इस बात के लिए गंभीर आलोचना होती रही है कि उसने एशियाई मुद्रा संकट के शिकार देशों को घिसी पिटी और नुकसानदेह नीतियां अपनाने पर बाध्य किया. ऐसी आलोचना करनेवालों में प्रमुख थे विश्व बैंक के पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री जोसेफ़ स्टिग्लित्ज़.
स्टिग्लित्ज़ ने मुद्राकोष के पूर्व उप निदेशक स्टैनले फ़िशर समेत उन सब बड़े अधिकारियों की भी आलोचना की जो मुद्राकोष से रिटायर होने के बाद व्यावसायिक बैंकों की नौकरी करने लगे थे.
और जवाब में मुद्राकोष के मुख्य अर्थशास्त्री केनेथ रौजौफ़ ने कहा कि इस साल अर्थशास्र का नोबेल पुरस्कार जीतने वाले स्टिग्लित्ज़ "नीति निर्देशक के तौर पर एक कद्दावर विद्वान हैं , लेकिन वे उतने आकर्षक नहीं हैं." |
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