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शुक्रवार, 17 मई, 2002 को 02:23 GMT तक के समाचार
बेल्जियम में 'इच्छा मृत्यु' को मान्यता
आलोचकों का मानना है कि जीवन का अधिकार ज़्यादा ज़रूरी है
आलोचकों का मानना है कि जीवन का अधिकार ज़्यादा ज़रूरी है

बेल्जियम ने 'यूथेनेज़िया' या इच्छा मृत्यु को क़ानूनी मान्यता दे दी है और अब वह नेदरलैंड्स के बाद ऐसा करने वाला दूसरा देश बन गया है.

बेल्जियम की संसद के निचले सदन में दो दिन चली गर्मागर्म बहस के बाद इस प्रस्ताव को 51 के मुक़ाबले 86 मतों से पारित कर दिया गया. दस लोगों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया.

इस परिणाम की अपेक्षा की जा रही थी क्योंकि बेल्जियम की सीनेट ने गत अक्तूबर में ही इसका अनुमोदन कर दिया था.

लेकिन नेदरलैंड्स की तरह यहाँ भी इसके इस्तेमाल के लिए कड़ी शर्तें हैं.

होशहवास में मांग

जो मरीज़ अपने जीवन का अंत करना चाहते हैं वे पूरी तरह होश में होना चाहिएं और उन्हें अपने इस आग्रह को दोहराना होगा. वे यह मांग तभी कर सकते हैं यदि वे किसी दुर्घटना या असाध्य रोग का शिकार हो कर असहनीय शारीरिक या मानसिक पीड़ा झेल रहे हों.

इस क़ानून के तहत मरीज़ों की दर्द निवारक दवाइयों तक पहुंच होनी ज़रूरी है-यानि कोई मरीज़ इस वजह से अपनी जान देने के बारे में न सोचे कि ग़रीबी के कारण कोई अपना इलाज न करा पाने की स्थिति में हो.

पिछले महीने पारित हुए नेदरलैंड्स के क़ानून के विपरीत बेल्जियम में नाबालिग़ों को इसकी मांग का अधिकार नहीं होगा.

यदि कोई ऐसा व्यक्ति इच्छा मृत्यु की मांग करेगा जिसका रोग लाइलाज नहीं है तो उसके लिए किसी तीसरे पक्ष द्वारा चिकित्सीय जाँच ज़रूरी होगी.

अलग-अलग मत

इस विवाद ने बेल्जियम की राजनीति में दो अलग-अलग विचारधाराओं को जन्म दे दिया है.

कुछ लोगों का कहना है कि हर व्यक्ति को गरिमा से मरने का अधिकार है तो इसके आलोचक कहते हैं कि इसके दुरुपयोग के ख़िलाफ़ बहुत ज़्यादा क़दम नहीं उठाए गए हैं.

पिछले दिनों ब्रिटेन में यह मामला काफ़ी चर्चा में रहा जब डाएन प्रेटी नाम की एक महिला ने अपने पति की सहायता से जान देने की अनुमति मांगी.

उनकी अपील रद्द कर दी गई और कुछ दिन पहले डाएन की प्राकृतिक रूप से मृत्यु हो गई.

 
 
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