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शुक्रवार, 17 मई, 2002 को 01:35 GMT तक के समाचार डायनासोर इतना विशाल कैसे
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उल्का पिंड डायनासोर के लोप का कारण हो सकते हैं
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अब तक ये तो सब जानते थे कि एक विशाल उल्का पिंड के पृथ्वी पर गिरने से डायनासोर का अस्तित्व समाप्त हो गया.
लेकिन अब वैज्ञानिकों का कहना है कि हो सकता है ऐसा ही कोई उल्का पिंड पृथ्वी से उससे भी पहले टकराया हो जिससे डायनासोर का कद इतना बड़ा हो गया.
वैज्ञानिकों के एक दल ने उत्तरी अमरीका में 70 जगहों पर खोजबीन की और डायानासोर के जीवाश्म, उनके पदचिन्हों और रासायनिक अवशेषों की सूक्ष्म जाँच की.
जुरासिक काल
उनका कहना है कि इससे ये पता चला कि बड़े डायनासोरों की संख्या जुरासिक काल के आसपास बढ़ने लगी थी.
और ये शायद उसी समय के दौरान हुआ होगा जब भूगर्भवेत्ताओं के अनुसार पृथ्वी से बड़े पैमाने पर जीव लुप्त हो गए.
बीस करोड़ साल पहले हुई इस घटना से पर्यावरण में भी कुछ ऐसे बदलाव आए होंगे जिनका उस समय जीवित डायनासोरों ने फ़ायदा उठाया होगा.
साइंस पत्रिका में प्रकाशित इस शोध में कहा गया है कि खोज के दौरान जो एक महत्वपूर्ण चीज हाथ लगी है वह है उस समय के चट्टानों में धँसा ईरिडियम का एक टुकड़ा.
ईरिडियम
ईरिडियम पृथ्वी पर दूर्लभ है लेकिन धूमकेतुओं और क्षुद्रग्रहों पर उनका मिलना आम है.
और पृथ्वी पर उसका पाया जाना दर्शाता है कि शायद कोई उल्का पिंड नीचे गिरा था.
एक अमरीकी विश्वविद्यालय में कार्यरत प्रोफ़ेसर डेनिस केंट का कहना है कि इस खोज को जब उस समय मौजूद जीव-जंतुओं के अंशों के परिप्रेक्ष्य में रखकर देखा गया तो उस काल की जानकारी मिलती है.
इससे ये पता चलता है कि बड़े डायनासोर 20 करोड़ साल पहले ट्रियासिक काल के समाप्त होने के तुरंत बाद उभरे और ट्रियासिक से जुरासिक के पदचिन्हों में बदलाव केवल 50,000 वर्षों में हो गया.
प्रोफ़ेसर डेनिस केंट कहते हैं कि इस शोध से अंदाज़ा मिलता है कि कोई उल्का पिंड टकराया अवश्य था और उसके प्रभाव से डायनासोर के कई प्रतिस्पर्धियों का सफाया हो गया जिससे डायनासोर फल-फूल सके.
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