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मंगलवार, 14 मई, 2002 को 18:21 GMT तक के समाचार सितारों तक पहुँचना संभव होगा?
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सौर पंखों से अंतरिक्ष यात्रा काफ़ी सस्ती हो जाएगी
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क्या भविष्य में ऐसा अंतरिक्ष यान बन जाएगा जो गहन अंतरिक्ष में बगैर ईंधन के पहुँच सकेगा और दूर के ग्रहों-तारों का विचरण कर आएगा.
जी हाँ सौर उर्जा से यह संभव हो सकता है.
सूर्य की रोशनी से चलने वाले पहले अंतरिक्ष यान की तैयारी अंतिम चरणों में है.
अमरीकी स्पेस संस्था नासा और यूरोपीय स्पेस एंजेसी इस कम बजट के मिशन की सफलता का उत्सुकता से इंतज़ार कर रहे हैं.
यह एक निजी प्रयोग है. अमरीका की प्लेनेटरी सोसाइटी पृथ्वी की परिक्रमा करने के लिए एक सौर पंखों वाले यान के प्रक्षेपण की तैयारी कर रही है.
इस प्रयोग से अंतरिक्ष यात्रा के एक नए युग का आरंभ हो सकता है. जिस तरह समुद्र में जहाज़ हवा से चल सकते हैं, उसी तरह सूर्य की उर्जा से अंतरिक्ष यान चल सकेंगे.
इस तकनीक में बहुत ही पतले, आईने के जैसे सौर पंखों का प्रयोग कर सूर्य के एक-एक कण को पकड़ने का विचार किया गया है.
सैद्धांतिक तौर पर यह फ़ोटोन उर्जा को पंख में भेज देंगे जिससे अंतरिक्ष यान आगे बढ़ सकेगा.
तारों को छूना
अंतरिक्ष और रोमांच के चाहने वाले सदा सितारों तक पहुँचने का सपना देखते रहे हैं.
यह तो संभव है कि साधारण ईंधन से कोई अंतरिक्ष यान मंगल ग्रह तक पहुँच जाए लेकिन उससे आगे जाना संभव नहीं.
 सुदूर अंतरिक्ष तक पहुँचना संभव हो सकेगा | सूर्य की उर्जा का प्रयोग कर इसी मानव कल्पना को पूरा करने कोशिश है. ताकि सौर उर्जा के सहारे सुदूर अंतरिक्ष के ग्रहों और सितारों तक पहुँचा जा सके.
पहले तो यह बात बहुत असाधारण लगती थी लेकिन अब विज्ञान जगत में ख़ासा उत्साह है कि शायद यह सौर पंख अंतरिक्ष के भीतर जाने की कल्पना को सकार कर दें.
सपनों की तकनीक
कॉस्मॉस 1 नामक यह मिशन अंतरिक्ष में मुफ़्त यात्रा का सपना सकार कर सकता है.
प्लेनटरी सोसाइटी और कॉस्मॉस स्टूडियोज़ का यह संयुक्त प्रयास है. कॉस्मॉस स्टूडियोज़ फ़िल्म निर्माताओं और लेखकों का एक समूह है जिसे वैज्ञानिक और लेखक कार्ल सेगान की विधवा ने शुरू किया है.
यह यान अपनी यात्रा एक रॉकेट पर शुरू करेगा जिसे रूस में एक पनडुब्बी से छोड़ा जाएगा.
यदि सब कुछ योजना के मुताबिक चलता है तो सौर पंखों वाला यान रॉकेट से अलग हो कर कुछ हफ़्तों तक सूर्य की उर्जा के सहारे पृथ्वी की परिक्रमा करेगा.
प्लेनेटरी सोसाइटी के निदेशक ने लुई फ़्रीडमेन ने लंदन के रॉयल एस्ट्रोनोमिकल सोसाइटी में मिशन के बारे में जानकारी दी.
उन्होंने कहा कि रूस में बना यह यान प्रारंभिक परीक्षण पार कर चुका है.
उन्होंने कहा भविष्य में सौर पंखों का उपयोग सूर्य का चक्कर लगाने या पृथ्वी की तरफ़ टकराने के रास्ते में बढ़ रहे उल्का पिंड का मार्ग बदलने के लिए भी किया जा सकता है.
अंतरिक्ष से संदेश
उन्होंने कहा कि धूमकेतुओं और उल्का पिंडों के नमूने लाने के लिए एक मिशन की भी संभावना है.
इस तरह के वैज्ञानिक उद्देश्यों के अलावा सौर उर्जा पर चलने वाले यान बनाने के पीछे व्यावसायिक कारण भी हैं.
रॉकेट ईंधन की आवश्यकता न रहने पर अंतरिक्ष में आना-जाना काफ़ी सस्ता हो जाएगा.
एक अमरीकी कंपनी - टीम इन्काउंटर - की तो योजना है कि एक सौर यान में पैसा देने वाले ग्राहकों की तस्वीरें, संदेश और डीएनए को तारों के बीच भेजा जाएगा.
एक बोतल मे संदेश रखकर अंतरिक्ष मे भेजने की कीमत को केवल पचास डालर रखा गया है. |
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