BBC World Service LogoHOMEPAGE | NEWS | SPORT | WORLD SERVICE DOWNLOAD FONT | Problem viewing?
BBCHindi.com

पहला पन्ना
भारत और पड़ोस
खेल और खिलाड़ी
कारोबार
विज्ञान
आपकी राय
विस्तार से पढ़िए
हमारे कार्यक्रम
प्रसारण समय
समाचार 
समीक्षाएं 
आजकल 
हमारे बारे में
हमारा पता
वेबगाइड
मदद चाहिए?
Sourh Asia News
BBC Urdu
BBC Bengali
BBC Nepali
BBC Tamil
 
BBC News
 
BBC Weather
 
 आप यहां हैं: 
 ताज़ा समाचार
मंगलवार, 14 मई, 2002 को 18:21 GMT तक के समाचार
सितारों तक पहुँचना संभव होगा?
सौर पंखों से अंतरिक्ष यात्रा काफ़ी सस्ती हो जाएगी
सौर पंखों से अंतरिक्ष यात्रा काफ़ी सस्ती हो जाएगी

क्या भविष्य में ऐसा अंतरिक्ष यान बन जाएगा जो गहन अंतरिक्ष में बगैर ईंधन के पहुँच सकेगा और दूर के ग्रहों-तारों का विचरण कर आएगा.

जी हाँ सौर उर्जा से यह संभव हो सकता है.

सूर्य की रोशनी से चलने वाले पहले अंतरिक्ष यान की तैयारी अंतिम चरणों में है.

अमरीकी स्पेस संस्था नासा और यूरोपीय स्पेस एंजेसी इस कम बजट के मिशन की सफलता का उत्सुकता से इंतज़ार कर रहे हैं.

यह एक निजी प्रयोग है. अमरीका की प्लेनेटरी सोसाइटी पृथ्वी की परिक्रमा करने के लिए एक सौर पंखों वाले यान के प्रक्षेपण की तैयारी कर रही है.

इस प्रयोग से अंतरिक्ष यात्रा के एक नए युग का आरंभ हो सकता है. जिस तरह समुद्र में जहाज़ हवा से चल सकते हैं, उसी तरह सूर्य की उर्जा से अंतरिक्ष यान चल सकेंगे.

इस तकनीक में बहुत ही पतले, आईने के जैसे सौर पंखों का प्रयोग कर सूर्य के एक-एक कण को पकड़ने का विचार किया गया है.

सैद्धांतिक तौर पर यह फ़ोटोन उर्जा को पंख में भेज देंगे जिससे अंतरिक्ष यान आगे बढ़ सकेगा.

तारों को छूना

अंतरिक्ष और रोमांच के चाहने वाले सदा सितारों तक पहुँचने का सपना देखते रहे हैं.

यह तो संभव है कि साधारण ईंधन से कोई अंतरिक्ष यान मंगल ग्रह तक पहुँच जाए लेकिन उससे आगे जाना संभव नहीं.


सुदूर अंतरिक्ष तक पहुँचना संभव हो सकेगा
सूर्य की उर्जा का प्रयोग कर इसी मानव कल्पना को पूरा करने कोशिश है. ताकि सौर उर्जा के सहारे सुदूर अंतरिक्ष के ग्रहों और सितारों तक पहुँचा जा सके.

पहले तो यह बात बहुत असाधारण लगती थी लेकिन अब विज्ञान जगत में ख़ासा उत्साह है कि शायद यह सौर पंख अंतरिक्ष के भीतर जाने की कल्पना को सकार कर दें.

सपनों की तकनीक

कॉस्मॉस 1 नामक यह मिशन अंतरिक्ष में मुफ़्त यात्रा का सपना सकार कर सकता है.

प्लेनटरी सोसाइटी और कॉस्मॉस स्टूडियोज़ का यह संयुक्त प्रयास है. कॉस्मॉस स्टूडियोज़ फ़िल्म निर्माताओं और लेखकों का एक समूह है जिसे वैज्ञानिक और लेखक कार्ल सेगान की विधवा ने शुरू किया है.

यह यान अपनी यात्रा एक रॉकेट पर शुरू करेगा जिसे रूस में एक पनडुब्बी से छोड़ा जाएगा.

यदि सब कुछ योजना के मुताबिक चलता है तो सौर पंखों वाला यान रॉकेट से अलग हो कर कुछ हफ़्तों तक सूर्य की उर्जा के सहारे पृथ्वी की परिक्रमा करेगा.

प्लेनेटरी सोसाइटी के निदेशक ने लुई फ़्रीडमेन ने लंदन के रॉयल एस्ट्रोनोमिकल सोसाइटी में मिशन के बारे में जानकारी दी.

उन्होंने कहा कि रूस में बना यह यान प्रारंभिक परीक्षण पार कर चुका है.

उन्होंने कहा भविष्य में सौर पंखों का उपयोग सूर्य का चक्कर लगाने या पृथ्वी की तरफ़ टकराने के रास्ते में बढ़ रहे उल्का पिंड का मार्ग बदलने के लिए भी किया जा सकता है.

अंतरिक्ष से संदेश

उन्होंने कहा कि धूमकेतुओं और उल्का पिंडों के नमूने लाने के लिए एक मिशन की भी संभावना है.

इस तरह के वैज्ञानिक उद्देश्यों के अलावा सौर उर्जा पर चलने वाले यान बनाने के पीछे व्यावसायिक कारण भी हैं.

रॉकेट ईंधन की आवश्यकता न रहने पर अंतरिक्ष में आना-जाना काफ़ी सस्ता हो जाएगा.

एक अमरीकी कंपनी - टीम इन्काउंटर - की तो योजना है कि एक सौर यान में पैसा देने वाले ग्राहकों की तस्वीरें, संदेश और डीएनए को तारों के बीच भेजा जाएगा.

एक बोतल मे संदेश रखकर अंतरिक्ष मे भेजने की कीमत को केवल पचास डालर रखा गया है.
 
 
अन्य ख़बरें
25 अप्रैल, 2002
कहानी अंतरिक्ष दूरबीन की
13 मई, 2002
अमरीका के बूढ़े अंतरिक्ष यान
05 मई, 2002
शटलवर्थ धरती पर लौटे
25 अप्रैल, 2002
मिला ब्रह्मांड की उम्र का सबूत
06 अप्रैल, 2002
मंगल पर जीवन की संभावना
इंटरनेट लिंक्स
प्लेनटरी सोसाइटी
टीम इन्काउंटर
बीबीसी अन्य वेब साइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है
ताज़ा समाचार
बग़दाद में दो अमरीकी मरे
फ़लस्तीन में फिर सत्ता संघर्ष?
हेडेन ने तोड़ा लारा का रिकॉर्ड
नाथन एस्टल ने शतक बनाया
तस्वीर भेजी और चकमा दिया
पूर्व गोरखा सैनिक मुक़दमा हारे
कैदियों के हक में उठी आवाज़







BBC copyright   ^^ हिंदी

पहला पन्ना | भारत और पड़ोस | खेल और खिलाड़ी
कारोबार | विज्ञान | आपकी राय | विस्तार से पढ़िए
 
 
  कार्यक्रम सूची | प्रसारण समय | हमारे बारे में | हमारा पता | वेबगाइड | मदद चाहिए?
 
 
  © BBC Hindi, Bush House, Strand, London WC2B 4PH, UK