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बुधवार, 27 मार्च, 2002 को 05:33 GMT तक के समाचार क्यों नहीं मिला ऑस्कर?
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आमिर ख़ान और लगान के निर्देशक आशुतोष गोवारीकर
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आकाश सोनी
लगान से न सिर्फ़ आमिर ख़ान को बल्कि पूरे भारतीय सिनेमा प्रेमियों को बहुत उम्मीदें थी लेकिन 74वें ऑस्कर पुरस्कार समारोह में अरमान पूरा न हो सका.
आमिर ख़ान या आशुतोष गोवारीकर की जगह मंच पर नज़र आए नो मैंस लैंड के बोस्नियाई निर्देशक डेनिस तानोविच.
अब भारत में यही समझने की कोशिश हो रही है कि चूक कहाँ हुई, लगान की टीम ऑस्कर क्रिकेट मैच की ही तरह ऑस्कर क्यों नहीं जीत पाई.
लगान ऑस्कर के विजेता चुनने वालों के लिए एक अनजान विषय पर बनी फ़िल्म थी | | शेखर कपूर | कुछ फ़िल्म समीक्षकों का कहना है कि लगान मई महीने में अमरीका में छोटे पैमाने पर रिलीज़ होगी जबकि नो मैंस लैंड और एमिली को अमरीका में काफ़ी पहले देखा जा चुका है.
ऑस्कर पुरस्कारों का फ़ैसला लगभग पाँच हज़ार सदस्यों की वोटिंग से होता है और अगर वोट डालने वालों ने फ़िल्म देखी ही नहीं तो वे उसे पुरस्कार के लिए वोट कैसे दे सकते हैं.
ऑस्कर के लिए मनोनीत हो चुकी अंग्रेज़ी फ़िल्म एलिज़ाबेथ के निर्देशक शेखर कपूर कहते हैं कि बात इतनी ही नहीं है.
शेखर कपूर का कहना है कि लगान ऑस्कर के विजेता चुनने वालों के लिए एक अनजान विषय पर बनी फ़िल्म थी. उनकी और हमारी संस्कृति में काफ़ी अंतर है.
जाने-माने अभिनेता सईद जाफ़री कहते हैं कि पश्चिम में इसी तरह धीरे-धीरे भारतीय फ़िल्मों की पहचान बनेगी, पुरस्कार न मिलने से निराश होने के बदले बड़ी संख्या में अच्छी फ़िल्में बनाने की ज़रूरत है.
शेखर कपूर का मानना है कि लगान ने बंबइया सिनेमा को एक नई राह दिखाई है. उसका मनोनीत होना ही कोई मामूली बात नहीं है.
अंतरराष्ट्रीय सिनेमा के प्रख्यात निर्देशक इस्माइल मर्चेंट कहते हैं कि भारत ऑस्कर पुरस्कार ज़रूर जीत सकता है क्योंकि प्रतिभा की कोई कमी नहीं है. बस ज़रूरत है-अच्छी कहानी और तकनीकी कौशल की. |
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