कैमरे का गुजरा ज़माना

22 अगस्त 2014 अतिम अपडेट 18:05 IST पर

जो आज नया है, वह कल पुराना हो जाएगा. देखिए बीते जमाने के कैमरे, उनकी तस्वीरें और उनमें क़ैद वे लम्हें...
पुराने कैमरों की प्रदर्शनी
दिलीश पारेख विंटेज कैमरों का संग्रह करते हैं और उन्होंने 19 अगस्त को दिल्ली में एक प्रदर्शनी का आयोजन किया. वे कहते हैं कि उनको फोटोग्राफी का शौक था जो धीरे धीरे कैमरे इकट्ठा करने के जुनून में बदल गया. भारत की पहली संसद के सदस्यों की फोटोग्राफी के लिए इसी कोडक पैनोरामिक कैमरे का इस्तेमाल किया गया था. (सभी फोटो और कैप्शन: अंकित पांडेय)
पुराने कैमरों की प्रदर्शनी
जुड़वां लेंस वाले रॉलीकॉर्ड कैमरे का इस्तेमाल 1933 से 1976 के बीच किया जाता था.
पुराने कैमरों की प्रदर्शनी
1870 से 1930 के बीच वुडेन 'डैग्वेरियोटाइप' कैमरे का इस्तेमाल किया जाता था.
पुराने कैमरों की प्रदर्शनी
1946 में बना कैनन रेंज फाइंडर कैमरे में फ़्लैश लाइट का इस्तेमाल किया गया था लेकिन खास बात यह थी कि एक फ़्लैश लाइट का इस्तेमाल सिर्फ एक ही बार किया जा सकता था.
पुराने कैमरों की प्रदर्शनी
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इस्तेमाल किया जाने वाला ये 'एरोमेटिक स्ट्रिंग कैमरा' फाइटर जेट्स में फिट कर दिया जाता था.
पुराने कैमरों की प्रदर्शनी
वाइड एंगल वाले इस कैमरे को फोटोग्राफरों की शान कहा जाता था.
पुराने कैमरों की प्रदर्शनी
1939 में आया कॉन्टाफ्लेक्स कैमरा उस दौर का सबसे महंगा कमैरा था. उस समय इसकी कीमत 372 डॉलर थी जो इस वक्त डॉलर की कीमत के हिसाब से 22,500 रुपए के करीब पड़ती है.
पुराने कैमरों की प्रदर्शनी
इस हैसलब्लैड मीडियम फॉरमेट कैमरे का इस्तेमाल अपोलो प्रोग्राम के लिए किया गया था.
पुराने कैमरों की प्रदर्शनी
वुडेन बॉक्स की तरह दिखने वाला ये रॉयल मेल फोटो स्टाम्प कैमरा एक बार में 15 पोस्ट कार्ड इमेज लेता था.
पुराने कैमरों की प्रदर्शनी
इस प्रदर्शनी में युवाओ में पुराने कैमरों को देखने लेकर काफी उत्साह था.