किताबों की कला प्रदर्शनी

23 अगस्त 2014 अतिम अपडेट 11:39 IST पर

पुस्तक प्रदर्शनी तो आपने बहुत देखी होगी लेकिन, पुस्तकों की थीम पर कोई कला प्रदर्शनी शायद ही देखी हो.
बुक आर्ट गैलरी
सामंता बत्रा मेहता की 'ऐन एन्थ्रोपोलॉजी ऑफ़ टाइम' कृति में किताबों के साथ प्लास्टिक प्लान्ट्स और इंक वग़ैरह का उपयोग किया गया है. मानवीय और पर्यावरण की स्थिति पर कलाकार ने अपनी प्रतिभा इस इन्स्टॉलेशन में प्रदर्शित किए हैं. (सभी फ़ोटो और कैप्शन: चिरंतना भट्ट)
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इस तस्वीर में दिखाई देने वाली 'बुलेट बुक' किंग्सले गुनाटिलाक की कृति है. श्रीलंकाई भाषा में लिखी यह किताब वहां के लोगों की कहानी है, जिसमें कलाकार ने सोने की गोलियां रखी हैं. वहां की सामाजिक-राजकीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह कृति बनाई गई है.
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'पैथोलॉजी ऑफ़ पिस' में सामन्ता बत्रा मेहता का विन्टेज किताबों से लगाव नज़र आता है. उनकी कला में ये बातें आसानी से घुलमिल जाती हैं. पर्सनल हिस्ट्री, जेन्डर कन्स्ट्रक्ट्स और सामाजिक-राजकीय व्यवस्था से प्रेरित होकर यह रचना बनाई गई है.
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'शैडो पैलेस' और अन्य कृतिओं में तन्मय सामान्ता ने किताबों के पन्नों को गोंद से जोड़ कर त्रिआयामी कृति बनाई है. तन्मय अपनी रचना तैयार करते समय किताबों की उपयोगिता, उसके विषय से व्यक्ति का लगाव जैसे मुद्दों को ध्यान में रखते हैं.
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तन्मय अपनी इस रचना 'कार्टोगार्फ़र्स पैरा़डौक्स-1-2' में अपने ट्रैवलॉग पढ़ने के शौक़ को प्रस्तुत किया है. वह हमेशा अन्य प्रदेशों के लोग, उनकी संस्कृति को लेकर उत्सुक रहे और इस रचना में उन्होंने एक मैप मेकर के बतौर काम किया है. सभी खंडों के बीच की रेखाओं को दूर करके विश्व को एक दिखाने का प्रयास किया गया है.
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बानु बाट्लीबोय 'एज ऑफ़ शिवा' की इस तस्वीर में पुरानी किताबों का उपयोग कर नई व्याख्या प्रस्तुत करते हैं. उन्होंने में अलग ही अंदाज में किताबों को मोड़ कर कलाकृति बनाई है.
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देंग यीफू अपने इस बुक आर्ट में अपने बचपन की स्मृतियों को ढालने का प्रयास करते हैं. चीनी कलाकार ने बचपन में अपनी संस्कृति की समीक्षा सुनी और खुद की संस्कृति को ही नकारा समझने वाले लोगों को भी देखा. अपनी रचना में उन्होंने सत्ता और संस्कृति का संघर्ष दिखाने की कोशिश की है.