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नीरद चौधरी... जीनियस या सनकी ?

1 अगस्त 2014 अतिम अपडेट 22:56 IST पर

नीरद चौधरी को भारत के सबसे विवादास्पद लेकिन काबिल लेखकों में माना जाता है.

द ऑटोबायोग्राफ़ी ऑफ़ एन अननोन इंडियन, कॉन्टिनेंट ऑफ़ सर्से, पैसेज टु इंग्लैंड जैसी पुस्तकों के लेखक नीरद चौधरी को पश्चिम में ज़रूर सराहा गया लेकिन भारत में उनको वो सम्मान कभी नहीं मिल पाया जिसके वो हक़दार थे.

उनके तथाकथित भारत विरोधी विचारों के कारण उनकी बहुत आलोचना हुई लेकिन उन्होंने इसकी कभी परवाह नहीं की. खुशवंत सिंह उन्हें अपना गुरू मानते थे और कहा करते थे कि नीरद बाबू को इस बात में बहुत आनंद आता था जब गलत कारणों से उनकी आलोचना की जाती थी.

ये सही है कि 1970 में इंगलैंड जाने के बाद वो भारत कभी नहीं लौटे और वहीं ऑक्सफ़र्ड में बस गए लेकिन ये बहुत कम लोगों को पता है कि उन्होंने आखिर तक अपने भारतीय पासपोर्ट को सरेंडर नहीं किया.

नीरद चौधरी की पंद्रहवीं पुण्य तिथि पर रेहान फ़ज़ल बता रहे हैं उनके व्यक्तित्व से जुड़े कुछ अनजान पहलुओं को.