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शरीर त्यागने इस घर आते हैं लोग..

 शुक्रवार, 25 जुलाई, 2014 को 18:52 IST तक के समाचार
  • मुक्ति भवन, वाराणसी
    105 साल की मुन्ना कुंवर वाराणसी के मुक्ति भवन में रहने आई हैं. उनके परिजन उनके साथ हैं. हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले मानते हैं कि वाराणसी में शरीर त्यागने से मुक्ति मिलती है.
  • मुक्ति भवन, वाराणसी
    दान पर चलने वाला मुक्ति भवन उन लोगों का हिसाब किताब रखता है जो वाराणसी में सिर्फ़ मरने के लिए आना चाहते हैं. ऐसे लोगों को यहां दो हफ़्ते तक रहने की आज़ादी है. अगर इस बीच उनकी मृत्यु नहीं होती तो उन्हें विनम्रतापूर्वक वहां से जाने को कहा जाता है.
  • मुक्ति भवन, वाराणसी
    80 साल की विधवा वाराणसी के मुमुक्षु भवन में अपना समय बिता रही हैं. यहां वह पूरे दिन भगवान की पूजा अर्चना में गुज़ारती हैं और एक कमरे में रहती हैं.
  • मुक्ति भवन, वाराणसी
    82 वर्ष के किशोर पांडे भी मुक्ति भवन में रह रहे हैं, जहां उनकी बेटी ऊषा तिवारी उन्हें ढांढस बंधा रही हैं. हिंदू मानते हैं कि जीवन के आख़िरी समय में वाराणसी आने से व्यक्ति पापमुक्त हो जाता है.
  • मुक्ति भवन, वाराणसी
    मुक्ति भवन के परिसर में ऐसे कई बुज़ुर्ग रह रहे हैं जो चाहते हैं कि उनकी मृत्यु वाराणसी में ही हो और उनका अंतिम संस्कार भी वहीं हो.
  • मुक्ति भवन, वाराणसी
    97 वर्ष की भोगला देवी के साथ उनके पोते दिव्येश तिवारी मौजूद हैं. भोगला देवी बीमार हैं और मुक्ति भवन में रह रही हैं.
  • मुक्ति भवन, वाराणसी
    मुक्ति भवन में भगवान की पूजा अर्चना के लिए दिन में पाठ होता है, जिसमें यहां रहने वाले बुज़ुर्ग भी शामिल होते हैं.
  • मुक्ति भवन, वाराणसी
    वाराणसी के मुक्ति भवन में 88 वर्षीय चंपा देवी की मृत्यु हो गई. उनकी 49 वर्षीय बेटी देवकी राय उनके पास ही मौजूद थीं.
  • मुक्ति भवन, वाराणसी
    वाराणसी में ऐसे कई भवन हैं जहां मुक्ति की आकांक्षा संजोए हिंदू पहुंचते हैं. उनका मानना है कि अगर वाराणसी में मृत्यु मिली तो उन्हें अगले जन्मों से मुक्ति मिल जाएगी.
  • मुक्ति भवन, वाराणसी
    बहुत से हिंदुओं का मानना है कि वाराणसी में मृत्यु के बाद अगर उनकी राख गंगा में बहा दी जाएगी तो उऩ्हें जीवन-मरण के चक्र से छुटकारा मिल जाएगा. इसे हिंदू धर्म में मोक्ष की संज्ञा दी गई है.
  • मुक्ति भवन, वाराणसी
    वाराणसी के घाट पर चिता में अग्नि देते एक परिजन. यहां अंतिम संस्कार के लिए कुछ कर्मचारी तैनात रहते हैं, जो चिता के बुझने के बाद राख और शरीर के अवशेषों को गंगा नदी में बहा देते हैं.
  • मुक्ति भवन, वाराणसी
    वाराणसी को पवित्रतम शहर की मान्यता हासिल है. यहां कई घाटों पर दाह संस्कार संपन्न किया जाता है.

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