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हर दिल अज़ीज़ वो प्याला..!

 सोमवार, 30 जून, 2014 को 15:37 IST तक के समाचार
  • भारतीय चाय
    भारत में प्रतिवर्ष 8,37,000 टन चाय पी जाती है. यहां चाय पीने की परम्परा हर वर्ग में देखी जा सकती है और शहर हों या कस्बे, सड़कों के किनारे लगभग हर जगह चायवाले मिलेंगे.
  • भारतीय चाय
    मुंबई में संतोष अपनी दुकान पर चाय उबालते हुए. उन्होंने 15 पहले जब चाय बेचना शुरू किया था, तब से यह इलाक़ा काफी कुछ बदल गया है. उन बहुत सारी जगहों पर जहां संतोष चाय देते थे, उनकी जगह अब बड़ी बड़ी इमारतों ने ली है. लेकिन अभी भी लोग ऑफिस की बजाय उनकी गाढ़ी दूध और अदरक वाली चाय को ज़्यादा पसंद करते हैं.
  • भारतीय चाय
    उत्तर भारत की चाय में अदरक एक अनिवार्य मसाला होता है और इसे स्वास्थ्यवर्द्धक मसाले के अलावा जाड़े में गर्मी देने वाला माना जाता है.
  • भारतीय चाय
    उन्नीसवीं और बीसवीं शताब्दी में जब ब्रितानी लोगों ने इसे लोकप्रिय बनाया तबसे चाय में अदरक मिलाना एक स्वाभाविक बात सी हो गई है.
  • भारतीय चाय
    शोभन बारवा की चाय की दुकान कोलकाता के सम्पन्न इलाक़े अलीपुर के बीच में है. सामान्य दिनों में वे आठ बजे रात तक रहते हैं लेकिन दुर्गा पूजा के दौरान वो सुबह पांच बजे तक चाय, अंडे और फ्रेंच टोस्ट बेचते हैं.
  • भारतीय चाय
    बिहार के पटना रेलवे स्टेशन पर चायवाले गणेश रात को चाय बनाते हुए. अधिकांश भारतीयों के जेहन में रेलवे स्टेशन का माहौल 'चाय चाय' की पुकार के साथ जुड़ा होता है. गणेश को ट्रेनों की आवाजाही की पूरी समय सारणी याद है.
  • भारतीय चाय
    चाय बेचना अक्सर पीढ़ियों का पारिवारिक व्यवसाय बन चुका है. वाराणसी में इस दुकान के मालिक ने अपने पिता के मरने के बाद से ही यहां बैठना शुरू कर दिया था.
  • भारतीय चाय
    वाराणसी में मणिकर्णिका घाट पर स्थित चाय की दुकान के मालिक लालू यादव ने अब तक सैकड़ों लोगों की अंतिम क्रिया के साक्षी रह चुके हैं. लालू के पिता ने चालीस वर्ष पहले इस दुकान को शुरू किया था. अंतिम क्रिया में आए परिजन यहां चाय पीते हैं.
  • भारतीय चाय
    दशकों पहले चाय को मिट्टी के बर्तन कुल्हड़ में परोसा जाता था. कोलकाता में प्याली के अलावा पूरे देश में प्लास्टिक कप और स्टील के गिलास स्थानीय पसंद के अनुसार चलन में आ चुके हैं.
  • भारतीय चाय
    तमिलनाडु के कोटागिरि में एक चाय बागान में पैदा हुईं रुक्मिणी पूरी ज़िंदगी चाय की पत्तियां तोड़ती रही हैं. पत्ती तोड़ने वाले समूह में सबसे बुज़ुर्ग होने की वजह से उन्हें अम्मा कहा जाता है. दोपहर को खाने की फुर्सत के दौरान पास की फैक्टरी से मिली चाय की तलछट से काली चाय बनाती हुईं.

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