देखी है काग़ज़ की कतरनों की ख़ूबसूरती!

23 अप्रैल 2014 अतिम अपडेट 10:25 IST पर

आप काग़ज़ की कतरनों के साथ खेले होंगे, उनके पुर्ज़े उड़ाए होंगे कि उनकी ख़ूबसूरती को भी शायद निहारा होगा लेकिन इस आर्ट गैलरी की बात ही कुछ और है.
अपने स्टूडियो में मटीस. फोटोग्राफ़र: लिडिया डेलेक्टोरस्काया
फ्रांसिसी पेंटर हेनरी मटीस ने 1940 के दशक की शुरुआत से एक तकनीक विकसित करनी शुरु की जिसके साथ उन्होंने अपने करियर के शुरुआती सालों में भी प्रयोग किया था. ये तकनीक थी रंगीन काग़ज़ को काटकर पेंटिंग बनाना. मटीस के जीवन के आखिरी छह साल में रंगीन काग़ज़ों के ये कट-आउट प्रमुख रहे और अब ये लंदन की टेट मॉर्डन गैलरी में एक प्रदर्शनी का केंद्र हैं. इस प्रदर्शनी में मटीस के आख़िरी अहम सालों की सभी प्रमुख कलाकृतियां प्रदर्शित हो रही हैं.
मुखौटों की एक कलाकृति, 1953. नेशनल गैलरी ऑफ़ आर्ट, वॉशिंगटन
ये प्रदर्शनी न्यूयॉर्क के मॉडर्न आर्ट संग्रहालय के संयोजन में तैयार की गई है. कहा जा रहा है कि साल 1943 से 1954 के बीच पेपर कट-आउट्स से बनी मटीस की कलाकृतियों की ये अब तक की सबसे विस्तृत प्रदर्शनी है. इसमें 120 कलाकृतियां शामिल हैं जिनमें से कई पहली बार एक साथ प्रदर्शित हो रही हैं. टेट संग्रहालय के निदेशक सर निकोलस सेरोटा इस प्रदर्शनी के सह-क्यूरेटर हैं और वो कहते हैं कि ''इस प्रदर्शनी के बारे में वे 30 साल से सपना देख रहे थे.''
द होर्स, द राइडर, द क्लाउन, 1943-44. सक्सेशन हेनरी मटीस
प्रदर्शनी के क्यूरेटर निकोलस कलिनन कहते हैं कि मटीस के रंगीन काग़ज़ों को काट कर कलाकृति या मकैट बनाना ''छोटे स्तर पर लगभग संयोग से शुरु हुआ''. शुरु में इन्हें किताबों और मैगज़ीन कवरों के डिज़ाइन के तौर पर बनाया गया था. पेंटिंग बनाने की जगह मटीस ने रंगीन काग़ज़ काटना पसंद किया क्योंकि दोबारा बनाने में रंग वैसे ही दिखते थे. जैज़ नाम की किताब के लिए मटीस ने जो 20 मकेट बनाए उनमें द होर्स, द राइडर और द क्लाउन शामिल हैं. टेट प्रदर्शनी में साल 1947 में छपी इस किताब की मूल प्रतिलिपि के साथ ही सभी 20 मकेट पहली बार एक साथ देखे जा सकेंगे.
इकेरस, 1943. सक्सेशन हेनरी मटीस
कलाकृति 'इकेरस' जो 'जैज़' कलेक्शन का हिस्सा है, वो मटीस की सबसे मशहूर कलाकृतियों में से एक है. इसका पोस्टर क्यूरेटर निकोलस कलीनन ने किशोरावस्था में अपने कमरे की दीवार पर लगाया था. कलीनन कहते हैं, "जब आप कट-आउट्स को देखते हैं तो वे सपाट नज़र आते हैं लेकिन असल में उनमें जान है-उनमें एक सतह है. अपने करियर के आखिर में किसी कलाकार का ऐसा काम करना अविश्वसनीय बात थी, न सिर्फ़ एक नया स्टाइल बल्कि एक पूरा नया माध्यम ईजाद करना."
ब्लू न्यूड वन. फाउंडेशन बेयेलर, रीहन, बासल.
टेट प्रदर्शनी के क्यूरेटर निकोलस कलीनन बताते हैं कि 1950 के दशक तक पहुंचते-पहुंचते मटीस ने रंगीन काग़ज़ों के कट-आउट्स का इस्तेमाल सिर्फ़ किताबों, टेपस्ट्री और सेरामिक के डिज़ाइन बनाने तक ही सीमित नहीं रखा बल्कि "वे इनसे खेलने लगे...ये कट-आउट्स एक पेंटिंग का रूप लेने लगे." मटीस ने इन कट-आउट्स बनाने की प्रक्रिया को ''रंगों में नक्क़ाशी'' की तरह बताया.
द स्नेल, 1953. टेट
प्रदर्शनी के सह क्यूरेटर सर निकोलस सेरोटा मानते हैं कि मटीस की कट-आउट्स की इस ''अनोखी'' प्रदर्शनी लगाने के लिए ''कई लोगों पर थोड़ा दबाव डालना पड़ा." "ये प्रदर्शनी इससे पहले इसलिए नहीं कभी नहीं लगाई गई क्योंकि एक तो ये कलाकृतियां बहुत ही नाज़ुक हैं और दूसरा जिन संग्रहालयों में ये प्रदर्शित हैं, ये वहां की सबसे मूल्यवान कलाकृतियों में शामिल हैं." टेट गैलरी ने मटीस का मशहूर कट-आउट द स्नेल 1960 के दशक के शुरुआती सालों में हासिल किया था और तब से ये इस संग्रहालय में ही है. अब ये पहली बार ब्रिटेन के बाहर जाएगी जब मटीस की कलाकृतियों की ये प्रदर्शनी अक्तूबर 2014 में न्यूयॉर्क में लगेगी.
मेमोरी ऑफ़ ओशनिया, 1953. म्यूज़ियम ऑफ़ मॉडर्न आर्ट, न्यू यॉर्क
'द मेमोरी ऑफ़ ओशनिया' फ़िलहाल न्यूयॉर्क के मॉर्डन आर्ट संग्रहालय में टंगी है. लेकिन मूलत: ये मटीस के वेनिस स्टूडियो में द स्नेल की कंपोज़िशन का हिस्सा थी. टेट में होने वाली प्रदर्शनी में ये दोनों कट-आउट्स 60 साल में पहली बार एक साथ प्रदर्शित होंगे.
मटीस का स्टूडियो. फोटोग्राफ़र लिडिया डेलेक्टोरस्काया.
टेट में प्रदर्शित होने वाले कई कट-आउट्स की ऊंचाई ज़मीन से छत तक की है. टेट के निदेशक सर निकोलस सेरोटा कहते हैं, "सब कहते हैं कि ये काम तो एक छह साल का बच्चा भी कर सकता है. लेकिन मैं मानता हूं कि जब आप प्रदर्शनी देखते हैं तो आप समझते हैं कि असल में इसे सिर्फ़ एक खुले दिमाग़ का बुज़ुर्ग इंसान ही कर सकता है." ये प्रदर्शनी लंदन की टेट गैलरी में सात सितंबर तक चलेगी जिसके बाद इसे मध्य अक्तूबर तक न्यू यॉर्क के मॉडर्न आर्ट संग्रहालय में देखा जा सकता है. तीन जून को मटीस लाइव के लॉन्च के बाद इसे सिनेमा घरों में भी देखा जा सकेगा.