नेताओं के साथ पहलवान

3 अप्रैल 2014 अतिम अपडेट 17:37 IST पर

आम चुनावों में हर तरफ़ राजनीतिक माहौल गर्म है. ऐसे में परंपरागत अखाड़ों के कई पहलवान नेताओं की सुरक्षा का काम कर रहे हैं. इन पहलवानों के लिए नेताओं की सुरक्षा रोजी-रोटी का साधन है.
अखाड़े में कुश्ती लड़ते दो पहलवान
भारत में पहलवानी और अखाड़ों की परंपरा सदियों पुरानी है लेकिन समय के साथ पहलवानों की भूमिका भी बदल रही है. चुनावी माहौल में कई पहलवान नेताओं के निजी सुरक्षाकर्मियों के रूप में काम कर रहे हैं. (सभी फ़ोटो और कैप्शन- अंकित पांडे)
अखाड़े में अभ्यास करता पहलवान
भारत में पहलवानी की परंपरा हर छोटे और बड़े शहर में अखाड़ों में पनपती है.
अखाड़े के पहलवानों की ज़िंदगी
कई नौजवान कड़ी मेहनत के बाद पहलवान बन पाते हैं.
अखाड़े के पहलवानों की ज़िंदगी
और ये सिलसिला हर साल नए बच्चों के आने से चलता रहता है.
अखाड़े के पहलवानों की ज़िंदगी
बारीक दाँव-पेंच सीखने के बाद ये पहलवान अखाड़े मे उतरने के लिए तैयार होते हैं.
अखाड़े में कुश्ती लड़ते दो पहलवान
लेकिन इस चुनावी मौसम में मिट्टी की जगह नेताओं की रैलियों ने ली है.
अखाड़े के पहलवानों की ज़िंदगी
कई पहलवान सुबह अखाड़े में पसीना बहाते हैं और उनका बाक़ी दिन जाता है जीविका कमाने में.
अखाड़े के पहलवानों की ज़िंदगी
और चुनावी रैलियों में नेताओं की सुरक्षा के लिए इन्हे ख़ासतौर पर बुलाया जाता है.
अखाड़े के पहलवानों की ज़िंदगी
पर ऐसा क्या है जो इन पहलवानों को अखाड़ों से दूर कर रहा है? टीवी के इस दौर में कुश्ती की लोकप्रियता में कमी आई है. ख़ासकर छोटे शहरों और कस्बों में होनी वाले मुक़ाबलों की संख्या तेज़ी से कम हुई है.
अखाड़े के पहलवानों की ज़िंदगी
राष्ट्रीय स्तर पर मुक़ाबला बेहद तगड़ा होता है और कुछ ही पहलवान अपनी पहचान बना पाते हैं. पर एक दशक पहले तक छोटे शहरों और क़स्बों मे होने वाले मुक़ाबलों मे बाक़ी पहलवान अपनी पहचान बना लेते थे.
अखाड़े के पहलवानों की ज़िंदगी
पर अब ऐसा नहीं है और कई पहलवानों के कदम मॉल्स, रैलियों, और सुरक्षा देने वाली प्राइवेट कंपनियों की तरफ बढ़ जाते हैं.
अखाड़े के पहलवानों की ज़िंदगी
जितेंद्र भट्टी कुश्ती के साथ साथ नाइट क्लबों में बाउंसर का भी काम करते हैं.
अखाड़े के पहलवानों की ज़िंदगी
सेवाराम भी अब निजी सुरक्षा देने वाली कंपनियों के साथ काम करते हैं.
अखाड़े के पहलवानों की ज़िंदगी
सालों की मेहनत के बाद पहलवान कुश्ती में अपनी पहचान बना पाते हैं लेकिन कुछ पहलवानों ने बताया की अखाड़े के बाहर किसी भी काम में सिर्फ़ अकेलापन होता है.