अफगानिस्तान के बामियान में बुज़कशी

31 मार्च 2014 अतिम अपडेट 21:58 IST पर

कहते हैं कि बुज़कशी का खेल कमजोर लोगों का नहीं है. अफगानिस्तान के पारंपरिक कबीलों में ये खासा लोकप्रिय रहा है. देखिए बामियान में बुज़कशी.
बुज़काशीः जवां अफ़गान मर्दों का खेल
बुज़कशी कमजोर लोगों का खेल नहीं है और अफगानिस्तान में ये खासा लोकप्रिय है. माना जाता है कि इस खेल की शुरुआत उस दौर में हुई थी जब कबायली लोगों का मुख्य पेशा शिकार करना रहा होगा. अफगानिस्तान के बामियान सूबे में 23 मार्च को बुज़कशी के खेल का आयोजन किया गया. फोटो साभारः समाचार एजेंसी एएफपी.
बुज़कशीः जवां अफ़गान मर्दों का खेल
बुज़कशी अफगानिस्तान के पारंपरिक खेलों में शुमार किया जाता है. ये सदियों पुराना खेल है जिसमें घुड़सवारों की दो प्रतिद्वंदी टीमें बकरा छीनने के लिए एक दूसरे से होड़ करती हैं. फोटो साभारः समाचार एजेंसी एएफपी.
बुज़कशीः जवां अफ़गान मर्दों का खेल
बामियान को बुद्ध की विशाल ऐतिहासिक प्रतिमाओं के लिए भी जाना जाता है. साल 2001 में तालिबान के दौर में इन प्रतिमाओं को क्षतिग्रस्त कर दिया गया था. फोटो साभारः समाचार एजेंसी एएफपी.
बुज़कशीः जवां अफ़गान मर्दों का खेल
साठ के दशक में बामियान सैलानियों के आकर्षण का एक बड़ा केंद्र हुआ करता था. बामियान अब दोबारा से कोशिश कर रहा है कि सैलानी फिर से उसकी ओर रुख करे, बुज़कशी के खेल के इस आयोजन से यही उम्मीद की जा रही है. फोटो साभारः समाचार एजेंसी एएफपी.
बुज़कशीः जवां अफ़गान मर्दों का खेल
बामियान के आस-पास के इलाके बेहद अशांत माने जाते हैं लेकिन इसके बावजूद इसकी खूबसूरती लोगों को अपनी ओर खींचती है. फोटो साभारः समाचार एजेंसी एएफपी.
बुज़कशीः जवां अफ़गान मर्दों का खेल
सैलानी बामियान के पहाड़, झील, ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व की चीजों को देखने आते हैं. फोटो साभारः समाचार एजेंसी एएफपी.
बुज़कशीः जवां अफ़गान मर्दों का खेल
बुज़कशी को अफगानिस्तान का राष्ट्रीय खेल भी कहा जाता है. पारंपरिक रूप से बुज़कशी का खेल कई दिनों तक आयोजित किया जाता है लेकिन अब इस खेल का आयोजन नियंत्रित तरीके से किया जाता है जिसमें समय और मैचों की संख्या तय होती है. फोटो साभारः समाचार एजेंसी एएफपी.
बुज़कशीः जवां अफ़गान मर्दों का खेल
तालिबान के दौर में बुज़कशी के खेल पर रोक लगा दी गई थी लेकिन अफगानिस्तान में तालिबान के शासन के पतन के साथ ही ये दोबारा से शुरू हो गया. पारंपरिक कबीलों के बीच इसकी लोकप्रियता पहले जैसी ही बनी हुई है. फोटो साभारः समाचार एजेंसी एएफपी.