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क्या था शेख़ मुजीबुर रहमान की हत्या का सच?

28 मार्च 2014 अतिम अपडेट 20:14 IST पर

7 मार्च 1971 के दिन ढाका का रेसकोर्स मैदान लोगों से खचाखच भरा था. वहाँ मौजूद लगभग दस लाख लोगों के हाथों में बांस के डंडे थे, पाकिस्तानी सैनिकों के संभावित हमले से बचने के लिए नहीं, बल्कि एक प्रतिरोध या अवज्ञा के प्रतीक के तौर पर.

आज़ादी के पक्ष में नारे रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे. भीड़ का जायज़ा लेने के लिए पाकिस्तानी सेना का एक हेलीकॉप्टर ऊपर चक्कर लगा रहा था. सरकारी आदेश की अवहेलना करते हुए रेडियो पाकिस्तान का ढाका स्टेशन शेख़ मुजीब के उस भाषण को पूरे प्रांत में लाइव प्रसारित करने की अंतिम तैयारी कर रहा था.

हालांकि सेना ने भी उनकी इस कोशिश को विफल करने की पूरी तैयारी कर रखी थी. शेख़ मुजीब ने बोलना शुरू किया...और फिर क्या हुआ, सुनिए रेहान फ़ज़ल की विवेचना.