मुंबई चली मोनोरेल पर

1 फरवरी 2014 अतिम अपडेट 17:38 IST पर

मुंबई का नाम इतिहास में दर्ज होने जा रहा है. देश की कारोबारी राजधानी में सार्वजनिक यातायात की दिशा में एक नई पहल हुई है 'मोनोरेल.'
मुंबई मोनोरेल
मुंबई का नाम इतिहास में दर्ज होने जा रहा है. भारत की कारोबारी राजधानी में सार्वजनिक यातायात की दिशा में एक नई पहल हुई है और इसका नाम है 'मोनोरेल.'
मुंबई मोनोरेल
यक़ीन मानिए इसके चटख़ रंग आपकी आँखों को सुहाने लगेंगे. पिछले कुछ दिनों से मुंबई महानगर में चेम्बूर से वडाला तक मोनोरेल हर रोज़ फेरी लगा रही है. ये सफ़र तय करने में मोनोरेल को 15 मिनट लगता है.
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मुंबई में मोनोरेल को लेकर ख़ासा उत्साह है. लोग यातायात के इस नए साधन के बारे में बात कर रहे हैं. माना जा रहा है कि मोनोरेल और मेट्रो रेल दोनों ही मुंबई की लोकल ट्रेनों की भीड़ को अपनी ओर खींचने का काम करेंगी और शहर की यातायात व्यवस्था को पहले की तुलना में अधिक आरामदेह होने की उम्मीद जताई जा रही है.
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मेट्रो रेल के ज़रिए शहर के पूर्वी और पश्चिमी हिस्से को जोड़ने वाली लाइन वरसोवा, अंधेरी और घाटकोपर से होकर गुज़रती है लेकिन वडाला से चेम्बूर जाने वाले शहरियों को कोई दूसरी यातायात सुविधा लेनी पड़ती. मोनोरेल लिंक से इस रूट को जोड़े जाने का कई लोगों को फ़ायदा होगा.
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मोनोरेल परियोजना का पहला चरण वाडाला से चेम्बूर तक के 8.93 किलोमीटर रूट के पूरा होने के साथ ही तैयार है. इस रूट को मुंबई के व्यस्ततम रास्तों में गिना जाता है. इस परियोजना का दूसरा चरण वडाला से संत गज महाराज चौक तक है. 8.93 किलोमीटर के मोनोरेल रूट पर सात स्टेशन हैं.
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पहले चरण के मोनोरेल स्टेशन हैं, चेम्बूर, वीएन पुरव/आर सी मार्ग जंक्शन, फ़र्टिलाइज़र टाउनशिप, भारत पेट्रोलियम, मैसूर कॉलनी, भक्ति पार्क और वडाला डिपो.
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वडाला डिपो का विस्तार 6.5 हेक्टेयर में है. यहाँ 21 ट्रेनें पार्क की जा सकती हैं और ऑपरेशनल कंट्रोल प्रणाली भी यहीं पर बनाई गई है. वडाला डिपो में एक ट्रेनिंग सेंटर और एक पॉवर स्टेशन भी बनाया गया है.
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मोनोरेल के ऑपरेशनल कंट्रोल सेंटर की बड़ी सी दीवार को देखकर किसी को भी इसके स्पेस सेंटर होने का भ्रम हो सकता है लेकिन यहीं से ट्रेनों की स्पीड, सिग्नल, ब्रेक, संचार और सुरक्षा पर नियंत्रण रखा जाना है.
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मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) ने पूरी कोशिश की है कि मुंबई मेट्रो और मोनोरेल दोनों ही आधुनिक तकनीक की बेहतरीन सुविधाओं से लैसे हो.
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मुंबई मोनोरेल भारत की पहली मोनोरेल परियोजना है जिसकी कुल लंबाई 19.17 किलोमीटर है. इसे दो चरणों में पूरा किया जाना है, जिसके पहले चरण का काम पूरा भी हो चुका है. इतना ही नहीं यह विश्व की दूसरी सबसे लंबी मोनोरेल कॉरीडोर भी है.
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सबसे लंबी मोनोरेल कॉरीडोर जापान में है. ओसाका मोनोरेल कॉरीडोर की लंबाई 23.8 किलोमीटर है और इसमें 19 स्टेशन हैं जबकि मुंबई मोनोरेल कॉरीडोर में कुल 17 स्टेशन होंगे.
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ओसाका के अलावा जापान की राजधानी तोक्यो में भी 16.9 किलोमीटर लंबी मोनोरेल लाइन है. ये जानकर आपको हैरानी हो सकती है कि ओसाका मोनोरेल परियोजना को पूरा करने में 12,690 करोड़ रुपये की लागत आई जबकि मुंबई मोनोरेल को शुरू करने में तक़रीबन तीन हज़ार करोड़ रुपये का खर्च पड़ा.
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ओसाका मोनोरेल में यात्री किराया दो डॉलर से साढ़े चार डॉलर के क़रीब है जबकि मुंबई मोनोरेल का भाड़ा पांच रुपए से 19 रुपए के बीच रखा गया है. मुंबई मोनोरेल के डिब्बे हरे, गुलाबी और आसमानी नीले रंग के होंगे. सभी फ़ोटो और कैप्शनः मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए)