म्यांमार में फ़ैलता अफ़ीम का 'ज़हर'

3 फरवरी 2014 अतिम अपडेट 00:05 IST पर

यहाँ ग़रीबी ऐसी है कि एक मज़दूर ने चार महीने से एक ही कपड़े पहन रखे हैं. लेकिन चीनी सौदागर अफ़ीम के क़ारोबार में ख़ूब पैसा बना रहे हैं.
बर्मा के शान प्रांत में अफ़ीम की खेती
बर्मा के उत्तर में स्थित शान प्रांत की इस पहाड़ी की ऊँचाई समुद्र तल से पाँच हजार फीट है. देश के बाकी हिस्सों से यहाँ तापमान कहीं नीचे रहता है. जाड़ों के मौसम में तीन से पाँच डिग्री सेल्सियस के बीच. पहाड़ों की तलहटी और आस-पास के इलाकों में चाय और अफ़ीम की खेती की जाती है.
बर्मा के शान प्रांत में अफ़ीम की खेती
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के संवाददाता बर्मा के उन आठ पत्रकारों में थे जिन्होंने इस दूर दराज इलाके का दौरा किया. मैंटोंग शहर से यह लोग मोटर-साइकिल के जरिए जिस धूल भरे जिस रास्ते से यहाँ पहुँचे, वह महज दो फीट चौड़ा था. दिन भर के सफर के बाद रात एक गाँव में गुजारी जहाँ से लोइम्ग्मैन गाँव तक पहुँचने के लिए अगला पूरा दिन पैदल ही तय करना पड़ा. लोइम्ग्मैन गाँव चारों ओर से अफ़ीम के खेतों से घिरा हुआ है.
बर्मा के शान प्रांत में अफ़ीम की खेती
गोखु की उम्र 30 साल है और वह बर्मा के शान प्रांत की राजधानी लाशिओ से लोइम्ग्मैन गाँव के अफ़ीम के खेतों में काम करने आते हैं. अफ़ीम के खेतों में काम करने के एवज में गोखु को 4000 क्यात (बर्मा की मुद्रा) या तकरीबन 250 भारतीय रुपये मिलते हैं. खुद को गर्म रखने के लिए वह जलती हुई आग के पास खड़े हैं, उन्होंने वही कपड़े पहन रखे हैं जो चार महीने पहले जाड़े के मौसम की शुरुआत के वक्त पहने थे.
बर्मा के शान प्रांत में अफ़ीम की खेती
गोखु कहते हैं कि वे यहाँ चार सालों से काम कर रहे हैं क्योंकि उनके पास कोई और काम नहीं है. वो अपनी माँ को सालाना छह लाख क्यात या तकरीबन 37 हज़ार भारतीय रुपये भेज पाते हैं. गोखु का ये भी कहना है कि वे अफ़ीम नहीं लेते हैं लेकिन विद्रोही सशस्त्र गुट तांग नेशनल लिबरेशन आर्मी के एक जवान ने बताया कि गोखु की नम आँखें और सूखी त्वचा से यह साफ जाहिर होता है कि वह अभी भी अफ़ीम ले रहे हैं.
बर्मा के शान प्रांत में अफ़ीम की खेती
तांग नेशनल लिबरेशन आर्मी के इस जवान ने बताया कि उनकी जातीय सेना ने यहाँ के अफ़ीम के खेतों को नष्ट करने का फैसला किया है क्योंकि स्थानीय लोग इसकी लत का शिकार हो रहे थे. उनका कहना था कि चीनी सौदागर अफ़ीम के कारोबार में खूब पैसा बना रहे हैं लेकिन स्थानीय लोगों की गरीबी पहले की तरह बनी हुई है. लिबरेशन आर्मी के कमांडर-इन-चीफ़ तार खु लांग ने बताया कि उनकी जातीय सेना ने पिछले साल तीन हजार एकड़ में फैली अफ़ीम की खेती को नष्ट कर दिया है. उनका कहना था कि इस इलाके में दस हजार एकड़ में अफीम की खेती होती है और वे जहाँ तक मुमकिन है, इसे नष्ट करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं.
बर्मा के शान प्रांत में अफ़ीम की खेती
नशीले पदार्थों और उससे जुड़े अपराधों पर नजर रखने वाले संयुक्त राष्ट्र कार्यालय ने कहा है कि बर्मा में अफ़ीम का उत्पादन साल 2013 में 26 फीसदी की दर से बढ़ गया. एक अनुमान के मुताबिक ये 870 टन के करीब है. साल 2012 में म्यांमार की सरकार के साथ संयुक्त रूप से आरंभ किए गए मूल्यांकन के हिसाब से यह सबसे ज्यादा है. (सभी फोटो और कैप्शनः समाचार एजेंसी रायटर्स.)
बर्मा के शान प्रांत में अफ़ीम की खेती
रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तरी बर्मा में अफ़ीम के खेतों का रकबा बढ़ा है. साल 2012 में बर्मा के उत्तर में 51 हजार हैक्टेयर अफीम की खेती हुई थी जबकि साल 2014 में यह बढ़कर 57,800 हैक्टेयर हो गई. रिपोर्ट कहती है कि बर्मा में होने वाली अफीम की 92 फीसदी खेती शान प्रांत में होती है. इस इलाके में कई ऐसे सशस्त्र गुट सक्रिय हैं जिनके बारे में माना जाता है कि वह वर्षों से नशीले पदार्थों के कारोबार से जुड़े हुए हैं.