जिन्हें मर्दों की 'गंदी नज़र' से बचाने के लिए जलाया जाता है

23 जनवरी 2014 अतिम अपडेट 07:29 IST पर

जरा सोचिए कि किसी लड़की के लिए कितना मुश्किल होता होगा कि उसके वक्ष स्थल को सपाट करने के लिए उसे किसी ग़र्म चीज़ से दाग दिया जाए ताकि वो बची रहे. देखिए तस्वीरों में
कैमरून में महिलाओं की सामाजिक स्थिति
डौआला की एक धूल भरी सड़क किनारे बने एक घर में 28 साल की जूली एनजेसा अपनी माँ, पिता और चचेरे भाई बहनों के साथ रहती हैं. हर शुक्रवार को दोपहर के वक्त जूली के पड़ोस में किशोर उम्र की लड़कियों का जमघट लगता है. लड़कियों की इस मुलाकात में थोड़ा बहुत शोर शराबा, चहल-पहल और हफ्ते भर की शरारतों का जिक्र लाजिम रहता है. और इसके बाद जूली काम के मुद्दे पर आती हैं. वे अपने समुदाय की इन किशोर लड़कियों को उन खतरों के बारे में आगाह करती हैं जिनसे उन्हें व्यस्क होने के साथ पेश होना पड़ सकता है.
कैमरून में महिलाओं की सामाजिक स्थिति
पिछले कुछ सालों से जूली जिन मुद्दों पर इन लड़कियों के साथ बात कर रही हैं, उनमें 'ब्रेस्ट आयरनिंग' या वक्ष स्थल को किसी गर्म चीज से दागने का रिवाज भी एक है. कैमरून में कुछ माताएँ अपनी कमसिन बेटियों के विकसित होते वक्ष स्थल को सपाट करने के लिए उसे ग़र्म पत्थर से दाग दिया करती हैं. उनका इरादा अपनी बेटियों को पुरुषों की नजर में कम आकर्षक बनाने का होता है ताकि वे अपनी लड़कियों को कम उम्र में माँ बनने से बचा सकें. 'ब्रेस्ट आयरनिंग' एक बेहद ही तकलीफ़ देने वाली प्रक्रिया होती है जिसका किसी लड़की के स्वास्थ्य पर लंबे समय तक असर रहता है. (तस्वीर में जूली.)
कैमरून में महिलाओं की सामाजिक स्थिति
वक्ष स्थल को किसी ग़र्म चीज़ से दागने के चलन के बारे में सलीके से बात करने के लिए जूली की तुलना में बहुत कम लोग ऐसे हैं जिन्हें काबिल कहा जा सकता है. जूली की माँ जीनेवी ने अपनी बेटी के वक्ष स्थल को एक गर्म पत्थर से दाग दिया था. तब जूली 16 बरस की थीं. वह कहती हैं कि उन्हें अपनी माँ से कोई शिकायत नहीं है क्योंकि उसने जो कुछ भी किया मुझे मर्दों की बुरी नजर से बचाने के लिए किया क्योंकि मैं अब औरत बन गई थी.
कैमरून में महिलाओं की सामाजिक स्थिति
जूली और उनकी तरह 'ब्रेस्ट आयरनिंग' से प्रभावित की कई महिलाओं ने बीते एक दशक से इस रिवाज के ख़िलाफ़ एकजुट होकर मोर्चा खोला हुआ है. वे देश भर में लोगों को इस बारे में जागरूक करने की कोशिश कर रही हैं. उनकी कोशिशों को अंतरराष्ट्रीय संस्था जर्मन डेवलपमेंट एजेंसी 'जीआईजेड' का समर्थन मिला हुआ है. जीआईजेड कैमरून में 'ब्रेस्ट आयरनिंग' को लेकर जागरूकता अभियान चला रहा है. इसके नतीजे भी सामने आ रहे हैं. कैमरून में एक सरकारी सर्वे में यह स्वीकार किया गया है कि पिछले दस सालों में 'ब्रेस्ट आयरनिंग' के मामले 50 फीसदी तक कम हुए हैं.
कैमरून में महिलाओं की सामाजिक स्थिति
जूली जिस मुकाम पर हैं, उसके लिए वे अपनी तरह की अन्य मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का शुक्रिया अता करती हैं. आज की लड़कियों को उन हालात का सामान उस तरह से नहीं करना पड़ता है जैसा कि जूली को करना पड़ा था. लेकिन कैमरून में गुरबत की जिंदगी जीने को मजबूर लड़कियों के सामने कई चुनौतियाँ हैं. उन्हें बलात्कार, कच्ची उम्र के गर्भ और सगे संबंधियों के व्याभिचार का सामना करना पड़ रहा है. ये मुश्किलें उनके सामने मर्द खड़ी कर रहे हैं. और इन लड़कियों के सामने विकल्प भी बहुत कम हैं कि वे इनका सामना कर पाएँ.
कैमरून में महिलाओं की सामाजिक स्थिति
इस बीच जूली को एक बुरी खबर मिली. उनकी चचेरी बहन, जिसकी उम्र 16 साल है, गर्भवती है. वह ठगा हुआ महसूस कर रही थी. लड़कियों के साथ सामूहिक बातचीत के दौरान अभी दो दिन पहले ही उन्होंने सबसे अपील की थी कि अपनी मुश्किलों के बारे में वे खुल कर बात करें. अब जूली इस बात को लेकर पेशोपेश में हैं कि वे अपनी बहन को क्या सलाह दें. कैमरून में गर्भपात अवैध है और ये ख़तरनाक हो सकता है. अगर उसके रूढ़िवादी कैथोलिक अभिभावकों को ये पता चलेगा कि गर्भपात की सलाह जूली ने ही दी थी तो वे उन्हें घर से बाहर निकाल देंगे. फ़ोटो और कैप्शनः समाचार एजेंसी रायटर्स.