बाग़ी नस्ल की बेबाक बातें

13 दिसंबर 2013 अतिम अपडेट 00:20 IST पर

70 के दशक के दौरान ब्रिटेन और अमरीका जैसे देशों में युवा वर्ग लीक से हटकर रास्ता तलाशना चाहते थे. ये उमंग उनके संगीत और जीवन शैली में भी झलकता था.
पंक्सः कैरेन नॉर और ओलिवियर रिकॉन
70 के दशक के उत्तरार्द्ध में ब्रिटेन में नौजवानों का एक तबका बागी तेवर अपना रहा था. जिंदगी जीने के इनके तौर-तरीके बाकी युवाओं से अलग थे. फोटोग्राफर कैरेन नॉर एंड ओलिवियर रिकॉन ने उस जमाने में विद्रोही कहे जाने वाले इन युवाओं पर बहुत काम किया था. पैरिस फोटो प्रदर्शनी में कैरेन और रिकॉन की तस्वीरें प्रदर्शित की गईं.
पंक्सः कैरेन नॉर और ओलिवियर रिकॉन
फोटोग्राफर कैरेन नॉर और ओलिवियर रिकॉन दोनों साल 1976 में लंदन पहुँचे थे. लंदन के एक पॉलीटेक्निक कॉलेज में फिल्म और फोटोग्राफी की पढ़ाई के दौरान उनकी मुलाकात भी इसी साल हुई. तब ये कॉलेज फोटोग्राफी सीखने समझने की बेहतरीन जगहों में शुमार किया जाता था.
पंक्सः कैरेन नॉर और ओलिवियर रिकॉन
लंदन की उभरती हुई नई पीढ़ी पर काम करने के लिए दोनों फोटोग्राफर साथ हुए. इस पीढ़ी को 'पंक' का नाम दिया गया था और इनके तौर-तरीके और जिंदगी जीने का सलीका बाकी दुनिया से अलग था. उन्होंने इस नई नस्ल की तस्वीरें स्कूलों में, काम करने की जगहों पर खींची. नॉर और रिकॉन उन जगहों पर भी गए जहाँ विद्रोही तेवर रखने वाली ये पीढ़ी केवल रात में बाहर निकला करती थी.
पंक्सः कैरेन नॉर और ओलिवियर रिकॉन
कैरेन और ओलिवियर उस दौर की फोटोग्राफी की पारंपरिक शैली से कुछ अलग करना चाहते थे. ये ब्लैक एंड व्हॉइट तस्वीर किसी अनजाने फोटोग्राफर ने ली थी. तस्वीर में जो दिखता है उसे सच की तरह पेश किया जाता है लेकिन बेशक यह कोई अंतिम सत्य नहीं होता है. ये किसी घटना के कई संभावित पहलुओं में से एक होता है.
पंक्सः कैरेन नॉर और ओलिवियर रिकॉन
फ्लैश का इस्तेमाल करने के बजाय कैरेन और ओलिवियर ने इसे बंद करना बेहतर समझा. वे ये सुनिश्चित करना चाहते थे कि तस्वीरें बेहतरीन गुणवत्ता वाली हों और फोटोग्राफर और फोटो के सबजेक्ट के बीच का रिश्ता उभरकर आए.
पंक्सः कैरेन नॉर और ओलिवियर रिकॉन
उस वक्त उन्होंने लिखा था, "हमने अपनी तस्वीरों के सबजेक्ट से सीधे रूबरू होने का रास्ता चुना. यही वजह है कि इन तस्वीरों में हमारी छाप दिखाई देती है. हमने सामान्य तरीके से इस विद्रोही पीढ़ी को तस्वीरों के जरिए उभारने की कोशिश की ताकि उन्हें आसानी से समझा जा सके."
पंक्सः कैरेन नॉर और ओलिवियर रिकॉन
ये तय किया गया कि इनकी तस्वीरें ब्लैक एंड व्हॉइट रंग में ली जाएंगी ताकि रंग प्रभावशाली तरीके से उभर सकें.
पंक्सः कैरेन नॉर और ओलिवियर रिकॉन
अपनी किताब की शुरुआत में कैरेन नॉर और ओलिवियर रिकॉन लिखते हैं कि पंक मूवमेंट या इस विद्रोही पीढ़ी का विरोध न केवल बातों से ही जाहिर होता था बल्कि उनके पहनावे-ओढ़ावे से लेकर उनके बर्ताव में भी दिखता था.
पंक्सः कैरेन नॉर और ओलिवियर रिकॉन
कैरेन और ओलिवियर कहते हैं, "बनावटी खूबसूरती और तब के दौर में जो कुछ भी यौवन से भरपूर था उसके खिलाफ युवा पीढ़ी का ही एक तबका खड़ा हो गया था. मार्क्स, माओ और नाज़ी भले ही कुछ और सोचते रहे हों लेकिन धीरे-धीरे फासले बेमानी होने लगे थे."
पंक्सः कैरेन नॉर और ओलिवियर रिकॉन
ये तस्वीरें साल 1977 में ली गई थीं. तस्वीरें लंदन क्लब, रॉक्सी और ग्लोबल विलेज जैसे क्लबों में खींची गईं थी.
पंक्सः कैरेन नॉर और ओलिवियर रिकॉन
कैरेन नॉर और ओलिवियर रिकॉन दोनों ही फिलहाल फोटोग्राफी की प्रोफेसर हैं. दोनों की किताब पंक्स का प्रकाशन गोस्ट बुक्स ने किया है.