बिहार में सोनपुर मेले की धूम

24 नवंबर 2013 अतिम अपडेट 10:18 IST पर

बिहार के इन दिनों सोनपुर मेले की धूम है. लगभग एक महीने तक चलने वाले इस मेले को लेकर स्थानीय लोगों में काफी उत्साह है. यहां लगने वाले पशु मेले और पक्षियों के मेला तो दुनिया भर में मशहूर है.
सोनपुर मेला, बिहार
विश्व विख्यात सोनपुर मेला 16 नवंबर को शुरू हुआ है. यह मेला पूरे एक महीने तक चलता है और इसे हरिहर क्षेत्र के मेले के नाम से भी जाना जाता है.
सोनपुर मेला, बिहार
हिंदू मान्यताओं के अलावे हरिहर क्षेत्र का जिक्र सिख और बौद्ध धर्म ग्रंथों में भी है. वैसे सोनपुर मेले का चिडि़या बाजार भी बहुत प्रसिद्ध है.
सोनपुर मेला, बिहार
मेले में हर दिन बिहार सरकार के पर्यटन विभाग के द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया जाता है. इस बार मेले में बच्चों ने भी मनमोहक प्रस्तुतियां दी हैं.
सोनपुर मेला, बिहार
हरिहरनाथ का मंदिर दुनिया का इकलौता ऐसा मंदिर है जिसमें हरि (विष्णु) और हर (शिव) की एकीकृत मूर्ति है. कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा और गंडक के संगम से जल भर कर बड़ी संख्या में भक्त मंदिर में जल चढ़ाते हैं. परंपरा के अनुसार पुजारी और पुजारिन संगम में एक विशेष छड़ी के साथ स्नान करते हैं. ऐसी मान्यता है कि उस दिन के यहां स्नान करने से गोदान का फल मिलता है और सारे पाप धुल जाते हैं.
सोनपुर मेला, बिहार
प्रदर्शनी और बिक्री के लिए आने वाले हाथी सोनपुर मेले की खास पहचान रहे हैं. हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इंद्रद्युम्न नामक एक राजा अगस्त मुनि के शाप से हाथी बन गए थे और हुहु नामक गंधर्व देवल मुनि के शाप से मगरमच्छ. कालांतरण में हाथी और मगरमच्छ के बीच सोनपुर में गंगा और गंडक के संगम पर युद्ध हुआ था जिसमें अंत में भगवान विष्णु ने आकर हाथी और मगरमच्छ बने राजा और गंधर्व दोनों का उद्धार किया था.
सोनपुर मेला, बिहार
एक जमाने में यह मेला जंगी हाथियों का सबसे बड़ा केंद्र था. बताया जाता है कि मौर्य वंश के संस्थापक चंद्रगुप्त, मुगल सम्राट अकबर और 1857 के गदर के नायक वीर कुंवर सिह ने भी से यहां हाथियों की खरीद की थी. सोनपुर मेले के प्रति विदेशी पर्यटकों में भी खास आकर्षण देखा जाता है.
सोनपुर मेला, बिहार
मेले के दौरान कई जगहों बीमारियों और बुरी आत्माओं से बचाने के लिए लोग हवन आदि का भी सहारा लेते हैं.
सोनपुर मेला, बिहार
मेला और साधुओं के बीच का रिश्ता अटूट और अनोखा है. सोनपुर मेले में भी बड़ी संख्या में देश के विभिन्न हिस्सों से साधु आते हैं और मेले का साधु गाछी इलाका भजन-कीर्तन और सप्त साधना का केंद्र बन जाता है.
सोनपुर मेला, बिहार
मेले के अवसर पर सोन नदी पर बने रेलवे पुल को भी आकर्षक तरीके से सजाया गया है.
सोनपुर मेला, बिहार
यह मेला अपने थियेटर और उनके कलाकारों के लिए भी प्रसिद्ध रहा है. लेकिन अब ये थियेटर अश्लील कार्यक्रमों के लिए जाने जाते हैं. इस बार मेले में आठ थियेटर कंपनियां आई हैं. सारण जिला प्रशासन का दावा है कि वह अश्लील कार्यक्रमों पर अंकुश लगाने के लिए उन पर खास निगरानी रखेगा.
सोनपुर मेला, बिहार
कार्यक्रम शुरू होने के पहले ही थियेटर कलाकार मंच पर एक-एक का मंच पर आती जाती हैं और अपने हुनर से मेला घूम रहे दर्शकों को आकर्षित करती हैं. (सभी तस्वीरें बीबीसी के लिए शैलेंद्र कुमार ने ली हैं, जबकि रिपोर्ट मनीष शांडिल्य ने भेजी है.)