सत्ता, सोना और सभ्यता

7 नवंबर 2013 अतिम अपडेट 11:30 IST पर

लंदन के ब्रिटिश म्यूज़ियम में एक प्रदर्शनी लगी है जिसमें प्राचीन कोलंबिया में सत्ता की ताक़त और सोने की भूमिका को दर्शाया गया है. ये प्रदर्शनी 23 मार्च 2014 तक चलेगी.
लंदन के ब्रिटिश म्यूज़ियम में एक प्रदर्शनी लगी है जिसमें प्राचीन कोलंबिया में सत्ता की ताक़त और सोने की भूमिका को दर्शाया गया है और ये बताने की कोशिश की गई है कि ये दोनों एक-दूसरे से कैसे जुड़े थे.
सदियों तक यूरोपीय लोग दक्षिण अमरीका में खोई हुई सभ्यता जैसी जानकारी के प्रभाव में थे. लेकिन प्रदर्शनी में ये बताया गया है कि इस मिथक के पीछे छुपी सच्चाई इससे भी ज्यादा रोचक थी.
एल डोराडो - जिसका शाब्दिक अर्थ है "स्वर्ण काल". असल में इसका अभिप्राय उस रिवाज से है जिसे कोलंबिया की राजधानी बगोटा के निकट गुआताविता झील के पास निभाया जाता था. ये वो जगह थी जहां मुइस्का सभ्यता के नेता स्वर्ण धूलि के साथ झील में गोता लगाते थे और नए नेता के रूप में उभरते थे.
ये प्रदर्शनी 23 मार्च 2014 तक चलेगी जिसमें 20वीं शताब्दी की शुरुआत में झील की खुदाई से मिली कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया है.
यहां प्रदर्शित कई कलाकृतियों में पशुओं की आकृतियां हैं और उनके पहने जाने से शायद व्यक्ति का दर्जा और उसके स्टेटस का पता चलता होगा.
ये लाइम पाउडर रखे जानेवाला एक कंटेनर है जिसका इस्तेमाल धार्मिक उत्सवों के दौरान कोको की पत्तियों को चबाने के लिए किया जाता होगा. इससे प्राचीन कोलंबियाई कलाकारों की तकनीकी दक्षता का पता चलता है.
पूर्व हिस्पैनिक (लातीन अमरीकी) सभ्यताओं में इस्तेमाल किया जाने वाला अधिकांश सोना शुद्ध नहीं होता था बल्कि ये चांदी और तांबे का मिश्र रूप होता था. ऑक्सीडेशन तकनीक की वजह से ऐसा लगता है कि ये कीमती धातु है.
कई बार पुरातत्ववेत्ताओं को क्विंबाया और तैरोना जैसी संस्कृतियों में इस्तेमाल की गई मोम तकनीक की बातें अचंभित करती रही हैं.
तैरोना संस्कृति में लोग कॉलर का भी इस्तेमाल करते थे. शायद उन्हें लगता था कि पशुओं की आकृति शरीर पर धारण करने से उनमें नई शक्ति आ जाती थी.