तिनका तिनका तिहाड़...

4 अक्तूबर 2013 अतिम अपडेट 18:12 IST पर

दिल्ली की तिहाड़ जेल के छह नंबर वॉर्ड में महिला क़ैदियों को रखा जाता है. जेल के कठिन जीवन में ज़िंदगी की कड़वी सच्चाई का सामना करती कुछ क़ैदियों ने अपना दर्द कविता में बयां किया है.
ये है दिल्ली की तिहाड़ जेल में प्रवेश का रास्ता. तिहाड़ के कारागार संख्या छह में महिला क़ैदियों को रखा जाता है. इन क़ैदियों के जीवन से जुड़ी बातें और उनका दर्द शायद ही कभी बाहर के लोग जान पाते हैं. लेकिन जेल अधिकारी विमला मेहरा और लेखिका वर्तिका नंदा के प्रयास से इन महिला क़ैदियों में से कुछ की जीवन की सच्चाइयां, उनका दर्द, उनकी पीड़ा एक क़िताब के रूप में सामने आई है जिसका नाम है 'तिनका तिनका तिहाड़'.
ये मूलत: एक काव्य पुस्तक है जिसमें क़ैदियों द्वारा खींची तस्वीरें भी हैं और है एक क्रम भी है जिसमें जेल जीवन को आरंभ से अंत तक प्रस्तुत किया गया है. तस्वीर में तिहाड़ के कारागार संख्या छह के बारे में सभी तथ्यात्मक जानकारियां देखी जा सकती हैं.
जब कोई महिला क़ैदी तिहाड़ पहुंचती है तो उन्हें औपचारिकता पूरी करने के लिए पहले यहीं बिठाया जाता है और फिर कारागार में भेज दिया जाता है.
'तिनका तिनका तिहाड़' की परियोजना के तहत वैसी महिला क़ैदियों को अपनी बात कविता के रूप में रखने को प्रेरित किया गया जो अपने मनोभावों को अभिव्यक्त कर सकती थीं और करना चाहती थीं. उसके बाद उनमें से चार क़ैदियों की कविताओं को जीवन की सच्चाइयों की बेबाक और कलात्मक अभिव्यक्ति के लिए चुना गया. तस्वीर में नज़र आ रही हैं रमा चौहान जो अच्छी-खासी नौकरीशुदा थीं, लेकिन हालात ने उन्हें तिहाड़ पहुंचा दिया. इन्होंने 'क़ैद पिंजरे की; 'सलाखें; 'बेटी की पुकार; 'मां के लिए माफ़ी' जैसी कविताओं में अपने दर्द को अभिव्यक्ति दी है.
ये हैं सीमा रघुवंशी जो अपनी शादी को विधिवत दर्ज करवाने से पहले ही एक घटना की वजह से तिहाड़ पहुंच गईं. उनके जीवन साथी जेल नंबर आठ में सज़ा काट रहे हैं. जेल जीवन की कठिनाइयों के बीच इनकी हसरत बाहर जाकर अपनी शादी को क़ानूनी रूप देना और बिखरे घोंसले को समेटने की है. इनकी कविताओं 'जीने की चाह; 'सोचा न था; 'चारदीवारी; 'खामोशी' में इनकी पीड़ा और कचोट बखूबी व्यक्त हुए हैं.
ये हैं आरती जिनकी सुबह कविता के साथ होती है और शाम भी कविता के साथ ही ढलती है. वो 8000 से ज़्यादा डायरियां लिख चुकी हैं जिसमें उनकी ज़िंदगी का हर दिन दर्ज है. जिंदगी के थपेड़ों ने उन्हें तिहाड़ पहुंचा दिया. उनकी बेटी नहीं जानती कि पिता की मौत हो गई है. जिंदगी ने जो दर्द दिए हैं उन्हें कविता में व्यक्त कर थोड़ा सुकून पा लेती हैं. उनकी कविताएं 'मैं; 'पाप; 'वक़्त की बात; 'दास्ताने ज़िंदगी भी अजीब है' इस संग्रह का हिस्सा हैं.
संग्रह की चौथी कवयित्री रिया शर्मा ने मनोविज्ञान और अर्थशास्त्र में बीए करने के बाद परिवार की सहमति से प्रेम विवाह किया था. शादी के दो साल भी पूरे नहीं हो सके थे कि हालात ने उन्हें और उनके पति को तिहाड़ पहुंचा दिया. रिया की कविताएं 'आज़ादी; 'हम आपके हो गए; 'मां; 'खालीपन; 'चाहत; 'कशमकश' में ज़िंदगी के कई रंग और यथार्थ काव्यात्मक रूप में व्यक्त हुए हैं.
और ये है तिहाड़ का वो रास्ता जिससे क़ैदी सज़ा काटने के बाद एक नई उम्मीद और जीवन के प्रति नए उत्साह के साथ जेल से बाहर निकलते हैं. पुस्तक में तिहाड़ में प्रवेश से लेकर जेल जीवन की समाप्ति को तस्वीरों के ज़रिए एक अर्थपूर्ण अभिव्यक्ति दी गई है. (सभी तस्वीरें - शोवन गांधी)