दिल्ली के बेघर- सड़कों पर है बसेरा

4 अक्तूबर 2013 अतिम अपडेट 08:54 IST पर

सर्दी हो या गर्मी, चादर को बिस्तर बनाकर ही गुज़ारा करते हैं दिल्ली के बेघर.
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भारत सरकार के मुताबिक़ देश के शहरों में 20 लाख बेघर रहते हैं. ये आंकड़ा वर्ष 2001 में की गई जनगणना पर आधारित है.
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ग़ैर-सरकारी संस्थाएं सरकार पर बेघर लोगों की सही गिनती ना करने का आरोप लगाती रही हैं.
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कई शोधकर्ताओं के मुताबिक़ भारत के हर शहर में औसतन एक फ़ीसदी लोग बेघर हैं यानि देशभर के शहरों में कुल तीन करोड़ लोग बेघर है.
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वर्ष 2011 में की गई जनगणना में भी बेघरों की गिनती की गई थी पर उसके आंकड़े आज तक जारी नहीं किए गए हैं.
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शहरों में बेघर लोगों की बढ़ती तादाद के पीछे छोटे शहरों का पिछड़ापन और बड़े शहरों में होता तेज़ विकास बताया जाता है.
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बेघर लोग अक्सर दिहाड़ी का काम करते हैं और काम के मुताबिक़ जगह बदलते रहते हैं. इन्हें रात के समय ही देखा जाता है, जब ये फ़ुटपाथ, फ्लाईओवर के नीचे या धार्मिक स्थलों के आसपास सोने आते हैं.
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बेघरों की जनगणना के लिए सरकार ने ख़ास तौर पर स्थानीय ग़ैर-सरकारी संस्थाओं की मदद से आधी रात के समय गणना का काम आयोजित किया था.