आओ कीचड़-कीचड़ खेलें

5 सितंबर 2013 अतिम अपडेट 15:59 IST पर

कहते हैं कीचड़ में कमल खिलता है लेकिन यहाँ तो कीचड़ में हुड़दंग हो रहा है. कहाँ हो रहा है कीचड़ का यह अजब-ग़ज़ब खेल?
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बीते हफ्ते पुणे से 25 किलोमीटर दूर जाधवगढ़ क़िले में 'मड रश' नाम से एक अनोखी दौड़ आयोजित की गई. इस दौड़ में शामिल प्रतियोगियों को सात किलोमीटर की ये दौड़ मिट्टी, कीचड़ , धूल भरे रास्तों से पार करनी थी. ढोल नगाड़ों के साथ दौड़ शुरू हुई. (सभी तस्वीरें बीबीसी संवाददाता वैभव दीवान की.)
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जाधवगढ़ क़िले के आस-पास बड़ी ख़ूबसूरत पहाड़ियां है. प्रतियोगियों को इन पहाड़ियों पर लगाए गई 21 अलग-अलग तरह की अड़चनों को पार करना था. जैसे पतले धागों को बिना छुए गुज़रना, या कांटेदार तारों को पार करना.
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दौड़ में पुरुषों और महिलाओं ने एक साथ भाग लिया. दौड़ की सबसे पहली अड़चन थी, आग के ऊपर से छलांग मार आगे बढ़ना.
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आसमान से गिरे कीचड़ में अटके.
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मिट्टी का असली खेल तो तब शुरू हुआ जब पहाड़ से उतरने की बारी आई. आयोजकों ने कीचड़ भरी बाधाएं तैयार कर रखी थीं. प्रतियोगियों को पहाड़ से फिसलते हुए नीचे आना था.
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बड़े-बड़े पाइप में से निकलते प्रतियोगियों की सीधा कीचड़ के स्विमिंग पुल में एंट्री. मुंह खुला और कीचड अंदर.
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चिकनी मिट्टी के दलदल में कई लोगों के पैर धंसे. एक पैर निकालने की कोशिश में वे दूसरा फंसा बैठते थे.
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ये है कीचड़ का कुआँ. चार फ़ीट गहरे इस गंदे पानी को देख प्रतियोगियों ने एकदम छलांग मार दी.
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दोस्तों के संग आए कई गुटों ने 'मड रश' में ख़ूब मज़े लूटे.
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इस दौड़ में कई प्रतियोगियों ने अपने जूतों को भी अलविदा कहा. एक प्रतियोगी ने बताया की उनके 6 हज़ार रुपए के ये जूते पांच साल से उनका पीछा नहीं छोड़ रहे थे, तो वे इन्हें यहाँ ले आए.
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ठंडी हवा और पहाड़ों के बीच प्रतियोगी एक अड़चन से दूसरी की ओर बढ़ते गए.
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एक के बाद एक पतली रस्सी पर क़दम बढ़ाते हुए आगे बढ़ना. इस राउंड में एकाग्रता जहां टूटती प्रतियोगी नीचे पड़ी मिट्टी में धड़ाम से गिरता था.
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इस मुक़ाबले में समय पर कोई रोक नहीं थी. दौड़ को कभी भी मज़े अनुसार पूरा किया जा सकता था. दौड़ पूरी करने पर सबको मेडल दिए गए और एक बियर भी पिलाई गई.