धूल भरी सड़क, रेलवे ट्रैक ..., तब आएगा स्कूल!

12 जुलाई 2013 अतिम अपडेट 00:39 IST पर

दुनिया भर में आज भी करोड़ों ऐसे बच्चे हैं जिन्हें स्कूल जाने का मौक़ा नहीं मिल पाता. सायलविया स्कूल तो जाती हैं लेकिन वहां तक पहुंचना जैसे 'जंग जीतने' के समान है.
तंजानिया की ग्रामीण बच्ची
आठ साल की सायलविया, तंज़ानिया के एक गांव में रहती हैं. उनकी दिलचस्पी शिक्षा हासिल करने में है. लेकिन स्कूल जाना उसके लिए किसी भारी मुसीबत से कम नहीं है. वह हर दिन डेढ़ घंटे की पैदल यात्रा करके अपने स्कूल पहुंचती हैं. उसके पास ना तो पहनने के लिए जूते हैं और ना स्कूली ड्रेस. अफ्रीका में करीब तीन करोड़ बच्चियां प्राथमिक शिक्षा हासिल नहीं कर पातीं.
तंजानिया की ग्रामीण बच्ची
सायलविया के पिता की मौत हो चुकी है. उनका परिवार दार एस सलाम से 300 किलोमीटर दूर रहता है और घर सड़क से आधा किलोमीटर भीतर है. 1999 और 2008 के बीच अफ्रीकी स्कूलों में लड़कियों का नमांकन 54 फ़ीसदी से बढ़कर 74 फ़ीसदी हुआ है, लेकिन अभी भी करीब 1.6 करोड़ लड़कियां स्कूलों में नहीं पहुंच पाई हैं. तंज़ानिया में 2001 में मुफ्त प्राथमिक शिक्षा लागू की गई.
तंजानिया की ग्रामीण बच्ची
सायलविया का स्कूल घर से सात किलोमीटर दूर है. मुख्य सड़क तक पहुंचना ही उसके लिए बड़ी चुनौती होती है, कच्ची सड़क के कंकर पत्थर से उसके पांव जख्मी हो जाते हैं. इस दौरान उसे सांपों के काटने का डर भी सताता रहता है.
तंजानिया की ग्रामीण बच्ची
उसके कपड़े अकसर इस लंबे सफ़र में गंदे हो जाते हैं. उसके पास एक ही स्कर्ट और एक ही शर्ट है. उनके माता-पिता के पास स्कूल की फीस, किताबों और कपड़ों के लिए पैसे नहीं हैं.
तंजानिया की ग्रामीण बच्ची
उसे वाहनों का ख़्याल रखना होता है. मौसम जैसे बरसात की अपनी दिक़्कते हैं जब सड़कों पर काफी पानी भरा होता है.
तंजानिया की ग्रामीण बच्ची
कई बार वो मुख्य सड़क छोड़ रेलवे ट्रैक के रास्ते स्कूल हो लेती है. लेकिन इसके अपने ख़तरे हैं. तंज़ानिया में बच्चों के अपहरण का अपराध के बहुत मामले होते हैं. ऐसे में किसी से लिफ्ट लेना भी ख़तरे से भरा होता है.
तंजानिया की ग्रामीण बच्ची
सायलविया ज्यों ज्यों बड़ी होती जाएंगी रास्ता और मुश्किल होता जाएगा. यौन शोषण एक बड़ी समस्या है.
तंजानिया की ग्रामीण बच्ची
स्कूल के बाद उसे फिर वहीं लंबे रास्ते से घर लौटना होता है. उसने स्वंयसेवी संस्था प्लान इंटरनेशनल से कहा, "मुझे यात्रा में कोई मजा नहीं आता, कई बार तो डर भी जाती हूं लेकिन शिक्षा हासिल करने के लिए मुझे इतनी दूर तक आना ही होता है."
तंजानिया की ग्रामीण बच्ची
जब सायलविया की 11साल की दोस्त राधिया उनके साथ होती है तब वह ख़ुद को कहीं ज़्यादा सुरक्षित महसूस करती हैं. लेकिन ऐसा हर दिन नहीं हो पाता. राधिया कहती है, "हम जब बड़े होंगे तो अपने परिवार की मदद करेंगे, ताकि उन्हें गरीबी में नहीं रहना पड़े."
तंजानिया की ग्रामीण बच्ची
यूनेस्को के आंकड़ों के मुताबिक अफ़्रीकी महादेश में प्राथमिक स्कूल से माध्यमिक स्कूल में पहुंचने वाले लोगों की दर 62 फ़ीसदी है लेकिन तंज़ानिया में यह महज 32 फ़ीसदी ही है. तंजानिया में माध्यमिक स्कूल की पढ़ाई मुफ्त नहीं होती है.
तंजानिया की ग्रामीण बच्ची
सायलविया के सौतले पिता उसकी पढ़ाई को बोझ मानते हैं. लेकिन सायलविया कहती है कि यह परिवार के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा. ( इस गैलरी में शामिल सभी तस्वीरें प्लान इंटरनेशनल की हैं और इसके फ़ोटोग्राफ़र जेम्स स्टोन हैं. दोनों लड़कियों की सुरक्षा के चलते उनके नाम बदल दिए गए हैं.)