आज़ादी का जश्न: स्टैचू ऑफ लिबर्टी

5 जुलाई 2013 अतिम अपडेट 13:32 IST पर

अमरीका और पूरी दुनिया में उम्मीद और आजादी का प्रतीक बन चुकी स्टैचू ऑफ लिबर्टी को एक बार फिर आम दर्शकों के लिए खोल दिया गया है. आखिर क्या है इस मूर्ति की खासियत.
न्यूयार्क हार्बर में स्टैचू ऑफ लिबर्टी अमरीका का प्रतीक है और दुनिया भर में इसे उम्मीद और आज़ादी की तस्वीर के तौर पर देखा जाता है. अमरीकी क्रांति के दौरान आपसी दोस्ती को मजबूत करने के लिए फ्रांस के लोगों ने यह मूर्ति अमरीका को दी थी.
इस मूर्ति का आधिकारिक नाम ‘लिबर्टी एन्लाइटिनिंग दि वर्ल्ड’ है और 1876 में स्थापित किया गया था. इसे फ्रेडरिक आगस्ते ने बनाया और इसे बनाने में 60 से अधिक लोगों ने करीब 10 साल तक पसीना बहाया.
ताँबे की मूर्ति और लोहे से बने इसके ढ़ाचे की मरम्मत पिछली शताब्दी में 1984 और 1986 के दौरान की गई. मरम्मत में करीब 8.7 करोड़ डॉलर का खर्च आया.
यह मूर्ति लोवर मैनहट्टन के लिबर्टी आईलैंड में स्थित है और इसकी ऊंचाई 46 मीटर है.
यह मूर्ति अमरीका के प्रतीक के रूप में इतना रच-बस गई है कि अमरीका विरोधी प्रचार के लिए भी इसका ही इस्तेमाल किया जाता है, जैसा कि ईरान की राजधानी तेहरान में पूर्व अमरीकी दूतावास की दीवार पर बना यह भित्तिचित्र.
इस मूर्ति का मुंह बंदरगाह की ओर है, जो एलिस द्वीप से अमरीका आने वाले लोगों का स्वागत करती हुई प्रतीत होती है.
स्टैचू ऑफ लिबर्टी को एक बार फिर दर्शकों के लिए खोल दिया गया है. इस मूर्ति को भारी तूफान के बाद पिछले साल मरम्मत के लिए बंद कर दिया गया था.
इस मूर्ति के लोहे के ढ़ाचे का डिजाइन फ्रांसीसी इंजीनियर एलेक्जेंडर गुस्ताव एफिल ने तैयार किया था. गुस्ताव ने ही एफिल टावर का डिजाइन बनाया था.
यह मूर्ति न्यूयार्क शहर के वार्षिक स्वतंत्रता दिवस आतिशबाजी उत्सव का केन्द्र है.
9/11 के हमले के बाद सुरक्षा कारणों से इस मूर्ति को बंद कर दिया गया. इसे 4 जुलाई 2009 को पर्यटकों के लिए दोबारा खोला गया.
इस मूर्ति का रखरखाव नेशनल पार्क सर्विस करती है, जबकि इससे पहले यह जिम्मेदारी डिपार्टमेंट ऑफ वार के पास थी.