फ़लक पर कुछ यूं दिखा पूरा चांद

23 जून 2013 अतिम अपडेट 16:22 IST पर

जब चंद्रमा धरती से सबसे निकटतम बिंदु पर पहुंचता है तो उसकी रोशनी देखने लायक होती है. ऐसा कुछ सालों के अंतराल पर होता है. इसे आमतौर पर लोग सुपरमून भी कहते हैं जो इस विशेष पूर्णिमा का ही पर्याय है.
सुपरमून
आज चांद आम दिनों के मुक़ाबले ज़्यादा बड़ा दिखाई दे रहा है. इसे सुपरमून कहते हैं. धरती के क़रीब आने पर चांद 14 फ़ीसदी बड़ा और 30 फ़ीसदी ज़्यादा चमकीला नज़र आता है. (फोटोः एपी)
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जो लोग बादलों की वजह से सुपरमून की ख़ूबसूरती देखने में चूक गए, उन्हें अब अगले साल अगस्त तक इंतज़ार करना होगा. (फोटोः एपी)
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इंग्लैंड में स्काई वॉचर्स बादलों की वजह से सुपरमून देखने से वंचित रहे हालांकि स्पेन में लोग बड़े चांद को देख पाए. सेन एंटोनियो में शनिवार शाम 'सुपरमून' की चांदनी धुंधली रही. (फोटोः एपी)
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रविवार को चंद्रमा अपनी पूर्ण अवस्था 'सुपरमून' में तब दिखेगा, जब यह पृथ्वी के सबसे ज़्यादा करीब होगा. (फोटोः एपी)
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हालांकि पृथ्वी के क़रीब होने की वजह से चांद सामान्य से कुछ बड़ा लगता है लेकिन लोग नंगी आंखों से इसका अंदाज़ नहीं लगा सकते. (फोटोः एपी)
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यूएस नेवल ऑब्जर्वेटरी की मदद से लोग चांद के उगने और डूबने का वक़्त जानकर उसे देख सकते हैं. अमरीका में उत्तरी केरोलिना के शार्लट में एक इमारत के पीछे से नज़र आता पूर्णिमा का चांद. (फोटोः एपी)
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चंद्रमा अंडाकार कक्ष में पृथ्वी की परिक्रमा करता है. यह पृथ्वी के क्षितिज के जितने क़रीब होता है, हमारी आंखों को इसके बड़े होने का भ्रम होने लगता है. (फोटोः एपी)
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वैज्ञानिक इन आशंकाओं से इनकार करते हैं कि सुपरमून की वजह से प्राकृतिक आपदाएं आती हैं. शुक्रवार को अमरीका के न्यू जर्सी के हैकेनसैक में पूर्णिमा का चांद कुबड़ा नज़र आया. (फोटोः एपी)
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वैज्ञानिक कहते हैं कभी-कभी हमारी आंखें धोखा खा जाती हैं और चांद बड़ा लगने लगता है. इसे वो ऑप्टिकल इल्यूज़न कहते हैं. (फोटोः एपी)
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पश्चिमी लंदन में भी पूर्ण चांद आम दिनों के मुकाबले बड़ा दिखाई दिया. इसकी रंगत सुनहरी दिखाई पड़ रही थी. (फोटोः बीबीसी)