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जहां लावारिस कुत्तों को मिलता है सहारा

 शनिवार, 18 मई, 2013 को 22:04 IST तक के समाचार
  • इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता के दक्षिणी इलाके में बना पेजातेन शेल्टर कुत्तों की एक आश्रयस्थली है. इसकी स्थापना 2009 में पांच हज़ार वर्गमीटर के क्षेत्र में की गई थी और आज यहां 300 लावारिस कुत्तों और 70 बिल्लियों को शरण दी गई है.
  • प्लूटो नाम के इस कुत्ते का गुर्दा जब ख़राब हो गया तो उसके मालिक ने उसे सड़क पर छोड़ दिया. तब बीमार प्लूटो को सहारा मिला पेजातेन शेल्टर का. आज इस आश्रयस्थल में उसका इलाज किया जा रहा है.
  • पेजातेन शेल्टर की स्थापना करनेवाली सुसन सोमाली पेशे से डॉक्टर हैं. कुत्तों के प्रति उनके और उनके पति के प्रेम ने ही उन्हें पेजातेन शेल्टर की स्थापना के लिए प्रेरित किया.
  • इसी शेल्टर में शिंता को उसकी मां सांति ने जन्म दिया. ये पिछले चार साल से यहां रहता है और इसे इंतज़ार है कि जल्दी ही कोई इसे अपना लेगा.
  • ब्राउनी नाम के इस लैब्रेडोर नस्ल के कुत्ते को 2007 में शेल्टर के पास से ही एक इलाके से बचाया गया था. पेजातेन शेल्टर में लाए जाने से पहले ब्राउनी सड़क पर खाने का सामान बेचनेवाले एक व्यक्ति की देखरेख में था.
  • ये कुत्ता पेजातेन शेल्टर में लाए जाने से पहले एक दवा कारोबारी के पास था. इसके मालिक को जब जकार्ता के उपनगरीय इलाके में गिरफ्तार कर लिया गया तब ये पेजातेन शेल्टर में लाया गया.
  • शेल्टर की संस्थापक सुसन वहां रहनेवाले 300 कुत्तों को उनके नाम से पहचानती हैं और हर एक के स्वभाव को भी समझती हैं.
  • इस शेल्टर में छह कर्मचारी काम करते हैं और उनका काम नियमित रूप से कुत्तों को खिलाना, उनके बाड़े की साफ़-सफ़ाई करना और उन्हें नहलाना है.
  • हालांकि पेजातेन शेल्टर निजी तौर पर चलाए जानेवाले कुछ लग्ज़री डॉग हाउस की तरह तो नहीं है लेकिन यहां कुत्तों की अच्छी देखभाल की जाती है. दिन में दो बार उन्हें भोजन दिया जाता है और नियमित रूप से नहलाया जाता है.
  • सुबह नाश्ते के बाद शेल्टर में रहनेवाले कुत्ते बाहर खुले में विचरण करते हैं. इस बीच उनके बाड़े की सफाई कर ली जाती है.
  • शेल्टर में रहनेवाले 300 कुत्तों को प्रतिदिन 20 किलोग्राम डॉगफ़ुड, 50 किलोग्राम चावल और 10 किलोग्राम मांस खिलाया जाता है.

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